भारतीय वायुसेना के स्वदेशी हल्के लड़ाकू विमान कार्यक्रम को झटका लगा है। हाल ही में HAL Tejas (LCA) का तीसरा बड़ा हादसा सामने आया, जिसके बाद Indian Air Force (IAF) ने एहतियातन पूरे तेजस बेड़े को अस्थायी रूप से ग्राउंड कर दिया है। इस फैसले के साथ ही तकनीकी जांच तेज कर दी गई है और उत्पादन एजेंसी Hindustan Aeronautics Limited (HAL) की Mk1A डिलीवरी समय-सीमा पर भी सवाल उठने लगे हैं।
रक्षा सूत्रों के अनुसार यह कदम सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता के सिद्धांत पर उठाया गया है।
लैंडिंग के दौरान तकनीकी समस्या, पायलट सुरक्षित
प्रारंभिक जानकारी के मुताबिक हादसा प्रशिक्षण उड़ान के बाद लैंडिंग चरण में हुआ। विमान को तकनीकी दिक्कत का सामना करना पड़ा और रनवे के पास संरचनात्मक क्षति हुई। पायलट ने समय रहते इजेक्शन किया और सुरक्षित हैं।
वायुसेना ने घटना के तुरंत बाद कोर्ट ऑफ इन्क्वायरी (CoI) के आदेश जारी किए हैं। उड़ान डेटा रिकॉर्डर, मेंटेनेंस लॉग, इंजन और फ्लाइट कंट्रोल सिस्टम की विस्तृत जांच की जा रही है।
तीन साल में तीसरा बड़ा हादसा: क्या संकेत मिलते हैं?
रक्षा विशेषज्ञों के अनुसार यह तीसरा बड़ा तेजस हादसा है:
- मार्च 2024 – पश्चिमी सेक्टर में प्रशिक्षण मिशन के दौरान दुर्घटना
- नवंबर 2025 – अंतरराष्ट्रीय एयर शो के दौरान हादसा
- फरवरी 2026 – लैंडिंग चरण में ताजा दुर्घटना
हालांकि लड़ाकू विमानों के ऑपरेशनल जीवन में शुरुआती वर्षों में तकनीकी चुनौतियाँ सामने आना असामान्य नहीं है, लेकिन लगातार घटनाएँ प्लेटफॉर्म की विश्वसनीयता पर गहन समीक्षा की मांग करती हैं।
IAF ने क्यों ग्राउंड किया पूरा बेड़ा?
IAF का निर्णय एक मानक सुरक्षा प्रक्रिया के तहत लिया गया है। जब भी किसी प्रकार की पुनरावृत्त तकनीकी समस्या की आशंका होती है, तो फ्लीट-वाइड जांच की जाती है।
इस कदम के तहत:
- सभी सक्रिय तेजस विमानों की ग्राउंडिंग
- एयरफ्रेम और इंजन का विशेष तकनीकी ऑडिट
- फ्लाइट कंट्रोल सॉफ्टवेयर की समीक्षा
- उत्पादन लाइन से निकलने वाले विमानों की अतिरिक्त जांच
रक्षा विश्लेषकों का मानना है कि यह निर्णय अल्पकालिक परिचालन असर डाल सकता है, लेकिन दीर्घकाल में सुरक्षा और विश्वसनीयता को मजबूत करेगा।
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Mk1A डिलीवरी में देरी: आधुनिकीकरण योजना पर दबाव
IAF ने HAL को 83 से अधिक उन्नत Tejas Mk1A विमानों का ऑर्डर दिया है, जिनमें AESA रडार, बेहतर इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर सूट और उन्नत एवियोनिक्स शामिल हैं।
हालांकि, उत्पादन और सप्लाई चेन से जुड़े मुद्दों के कारण डिलीवरी समय-सीमा खिसकती रही है।
विशेषज्ञों के अनुसार:
- इंजन सप्लाई और कंपोनेंट आयात में देरी
- एवियोनिक्स एकीकरण चुनौतियाँ
- वैश्विक सप्लाई चेन व्यवधान
इन कारणों से भारतीय वायुसेना की स्क्वाड्रन स्ट्रेंथ पर दबाव बना हुआ है।
क्या Tejas कार्यक्रम पर असर पड़ेगा?
Tejas भारत के स्वदेशी रक्षा निर्माण कार्यक्रम का प्रतीक है। यह ‘आत्मनिर्भर भारत’ पहल का अहम स्तंभ माना जाता है।
रक्षा मामलों के जानकारों का कहना है कि:
- एक या दो दुर्घटनाएँ किसी भी लड़ाकू विमान कार्यक्रम में असामान्य नहीं हैं
- महत्वपूर्ण यह है कि जांच कितनी पारदर्शी और तकनीकी रूप से गहन हो
- यदि कारण स्पष्ट कर सुधार लागू किए गए तो कार्यक्रम और मजबूत होकर उभरेगा
भारत भविष्य में Tejas Mk2 और AMCA जैसे उन्नत लड़ाकू कार्यक्रमों की दिशा में भी आगे बढ़ रहा है, ऐसे में वर्तमान जांच से मिलने वाले निष्कर्ष महत्वपूर्ण साबित होंगे।
आगे क्या?
जांच रिपोर्ट आने तक Tejas बेड़े की चरणबद्ध वापसी पर निर्णय लिया जाएगा। यदि किसी विशेष तकनीकी खामी की पुष्टि होती है, तो उसे उत्पादन और परिचालन दोनों स्तरों पर सुधारा जाएगा।
रक्षा मंत्रालय और वायुसेना की ओर से आधिकारिक बयान का इंतजार है, लेकिन सूत्रों का कहना है कि सुरक्षा से कोई समझौता नहीं किया जाएगा।
निष्कर्ष
Tejas LCA का ताजा हादसा भारत के स्वदेशी रक्षा विमान कार्यक्रम के लिए चुनौती जरूर है, लेकिन साथ ही यह सिस्टम की मजबूती जांचने का अवसर भी है। IAF द्वारा पूरे बेड़े को ग्राउंड करना एक सतर्क और जिम्मेदार कदम माना जा रहा है। अब सबकी निगाहें जांच रिपोर्ट और Mk1A डिलीवरी टाइमलाइन पर टिकी हैं।
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