चेन्नई: फिल्मी परिवारों से आने वाले अधिकांश स्टार किड्स अभिनय को अपने करियर का पहला कदम मानते हैं, लेकिन तमिल सुपरस्टार थलापति विजय के बेटे Jason Sanjay ने शुरुआत से ही अलग सोच अपनाई। जब उन्हें मलयालम सिनेमा के चर्चित निर्देशक अल्फोंस पुथरेन की फिल्म में मुख्य भूमिका निभाने का मौका मिला, तब उन्होंने ऐसा फैसला लिया जिसने सभी को हैरान कर दिया।
सालों बाद जेसन संजय ने पहली बार इस फैसले के पीछे की असली वजह साझा की है। उनका कहना है कि अभिनय उनके लिए कभी पहली पसंद नहीं रहा। वह हमेशा निर्देशन के जरिए फिल्मों की दुनिया में अपनी पहचान बनाना चाहते थे और इसी सोच के कारण उन्होंने एक बड़ा अभिनय प्रस्ताव ठुकरा दिया।
यह बयान ऐसे समय आया है जब Jason Sanjay अपनी पहली निर्देशित फिल्म ‘Sigma’ को लेकर चर्चा में हैं और फिल्म इंडस्ट्री उनकी नई पारी पर नजर बनाए हुए है।
जब मिला करियर का बड़ा मौका, लेकिन Jason Sanjay ने कर दिया इनकार
हाल ही में दिए एक इंटरव्यू में Jason Sanjay ने बताया कि उन्हें करीब 20 साल की उम्र में निर्देशक अल्फोंस पुथरेन की ओर से फिल्म में अभिनय का प्रस्ताव मिला था। अल्फोंस पुथरेन को ‘Premam’ और ‘Neram’ जैसी फिल्मों के लिए जाना जाता है और उनके साथ काम करना किसी भी नए कलाकार के लिए बड़ा अवसर माना जाता है।
इसके बावजूद Jason Sanjay ने यह ऑफर स्वीकार नहीं किया।
उनके अनुसार, वह उस समय भी अपने भविष्य को एक निर्देशक के रूप में देखते थे। उन्हें महसूस हुआ कि यदि उन्होंने अभिनय से शुरुआत की, तो उनका ध्यान अपने वास्तविक लक्ष्य से भटक सकता है। इसलिए उन्होंने लोकप्रियता से अधिक अपने जुनून को प्राथमिकता दी।
‘डायरेक्शन हमेशा मेरी पहली पसंद रहा’
Jason Sanjay ने कहा कि फिल्मों के माहौल में बड़े होने के कारण उन्होंने बचपन से शूटिंग सेट, फिल्म निर्माण और निर्देशन की पूरी प्रक्रिया को बेहद करीब से देखा।
इसी अनुभव ने उनके भीतर कहानियां गढ़ने, स्क्रीनप्ले विकसित करने और कैमरे के पीछे काम करने की रुचि पैदा की।
उन्होंने बताया कि निर्देशन उनके लिए सिर्फ एक पेशा नहीं, बल्कि रचनात्मक अभिव्यक्ति का माध्यम है। यही वजह है कि उन्होंने अभिनय के आसान रास्ते के बजाय निर्देशन की चुनौतीपूर्ण राह चुनी।
क्या भविष्य में एक्टिंग करते नजर आएंगे?
जेसन संजय ने यह जरूर कहा कि उन्होंने अभिनय से पूरी तरह दूरी नहीं बनाई है।
उनके मुताबिक, यदि भविष्य में कोई ऐसा किरदार सामने आता है जो उन्हें रचनात्मक रूप से चुनौतीपूर्ण और दिलचस्प लगे, तो वह अभिनय पर विचार कर सकते हैं। हालांकि फिलहाल उनका पूरा ध्यान निर्देशन और अपनी पहली फिल्म को सफल बनाने पर केंद्रित है।
यानी आने वाले समय में दर्शक उन्हें पर्दे पर भी देख सकते हैं, लेकिन अभी उनकी प्राथमिकता फिल्म निर्माण है।
‘Sigma’ से शुरू होगी निर्देशन की नई पारी
Jason Sanjay जल्द ही फिल्म ‘Sigma’ के जरिए निर्देशक के रूप में अपनी शुरुआत करने जा रहे हैं।
इस प्रोजेक्ट को लेकर फिल्म इंडस्ट्री में काफी उत्सुकता है, क्योंकि यह पहली बार होगा जब विजय के बेटे किसी फिल्म में अभिनेता नहीं, बल्कि निर्देशक की भूमिका में नजर आएंगे।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह फैसला जेसन को दूसरे स्टार किड्स से अलग पहचान दिला सकता है। अब दर्शकों की नजर इस बात पर है कि वह अपनी पहली फिल्म में कहानी, निर्देशन और प्रस्तुति के स्तर पर कितना प्रभाव छोड़ पाते हैं।
स्टार किड्स पर क्यों रहता है अलग दबाव?
बड़े सितारों के बच्चों के सामने सबसे बड़ी चुनौती अपनी अलग पहचान बनाना होती है। दर्शक अक्सर उनकी तुलना उनके माता-पिता से करने लगते हैं, जिससे उन पर अतिरिक्त दबाव बनता है।
ऐसे में Jason Sanjay का निर्देशन को चुनना यह दिखाता है कि वह अपने पिता की लोकप्रियता के सहारे नहीं, बल्कि अपनी रचनात्मक क्षमता के दम पर फिल्म इंडस्ट्री में जगह बनाना चाहते हैं।
यह फैसला जोखिम भरा जरूर है, लेकिन अगर वह सफल होते हैं तो यह उनकी अलग पहचान स्थापित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।
युवा फिल्मकारों के लिए क्या है सीख?
Jason Sanjay की कहानी केवल एक स्टार किड की यात्रा नहीं है, बल्कि उन युवाओं के लिए भी प्रेरणा है जो समाज या परिवार की अपेक्षाओं से अलग अपना करियर चुनना चाहते हैं।
कई बार सबसे आकर्षक अवसर ही सही अवसर नहीं होता। यदि आपका लक्ष्य स्पष्ट है और आप उसके लिए धैर्य के साथ काम करते हैं, तो लंबी अवधि में सफलता की संभावना अधिक होती है।
जेसन ने अभिनय की लोकप्रिय राह छोड़कर निर्देशन को चुना। यह फैसला बताता है कि करियर केवल प्रसिद्धि से नहीं, बल्कि अपनी वास्तविक रुचि और कौशल के अनुसार तय किया जाना चाहिए।
क्या बदल रही है भारतीय सिनेमा की नई पीढ़ी?
पिछले कुछ वर्षों में भारतीय फिल्म इंडस्ट्री में नई पीढ़ी के कलाकार और फिल्मकार पारंपरिक सोच से अलग फैसले लेते नजर आए हैं। कई स्टार किड्स अब केवल अभिनय तक सीमित नहीं रहना चाहते, बल्कि निर्देशन, लेखन और निर्माण जैसे क्षेत्रों में भी अपनी पहचान बना रहे हैं।
जेसन संजय का फैसला इसी बदलती सोच का उदाहरण माना जा रहा है। यह संकेत देता है कि आने वाले वर्षों में स्टार परिवारों की नई पीढ़ी केवल विरासत को आगे बढ़ाने के बजाय अपने लिए अलग रास्ते तलाशना चाहती है।
निष्कर्ष
अल्फोंस पुथरेन जैसे सफल निर्देशक की फिल्म का प्रस्ताव ठुकराना किसी भी नए कलाकार के लिए आसान फैसला नहीं हो सकता। लेकिन Jason Sanjay ने यह साबित किया कि उन्होंने लोकप्रियता के बजाय अपने लंबे लक्ष्य को प्राथमिकता दी।
अब उनकी पहली निर्देशित फिल्म ‘Sigma’ से यह तय होगा कि निर्देशन को लेकर उनका आत्मविश्वास कितना सही साबित होता है। हालांकि एक बात साफ है कि उन्होंने अपने करियर की शुरुआत से ही यह संदेश दे दिया है कि वह केवल ‘विजय के बेटे’ के रूप में नहीं, बल्कि अपनी मेहनत, रचनात्मक सोच और फिल्म निर्माण की समझ के दम पर भारतीय सिनेमा में अलग पहचान बनाना चाहते हैं। यही कारण है कि फिल्म प्रेमियों और इंडस्ट्री दोनों की नजर अब उनकी पहली फिल्म पर टिकी हुई है।