Central Board of Secondary Education(CBSE) की कक्षा 10 विज्ञान परीक्षा 2026: क्या रहा इस बार अलग और कैसा था पेपर?

सेक्शन-वाइज पेपर पैटर्न ने बदली रणनीति, कॉन्सेप्ट आधारित सवालों पर रहा जोर

केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) की कक्षा 10वीं विज्ञान परीक्षा 2026 इस बार अपने बदले हुए प्रारूप और संतुलित प्रश्न संरचना के कारण चर्चा में रही। परीक्षा 25 फरवरी को सुबह 10:30 बजे से दोपहर 1:30 बजे तक आयोजित की गई। छात्रों और शिक्षकों के अनुसार, इस वर्ष का प्रश्नपत्र न केवल सिलेबस के अनुरूप था, बल्कि अवधारणाओं की गहराई पर आधारित भी रहा।

तीन स्पष्ट भागों में बंटा प्रश्नपत्र

इस बार विज्ञान का प्रश्नपत्र भौतिकी, रसायन विज्ञान और जीवविज्ञान—इन तीन स्पष्ट सेक्शनों में विभाजित था। पहले के वर्षों में प्रश्न मिश्रित रूप में आते थे, लेकिन 2026 में सेक्शन-वाइज प्रस्तुति ने छात्रों को समय प्रबंधन में मदद की। पेपर शुरू होने से पहले 15 मिनट का रीडिंग टाइम दिया गया, जिससे परीक्षार्थियों को रणनीति बनाने का अवसर मिला।

प्रश्नों का स्तर: आसान से मध्यम

छात्रों की प्रतिक्रियाओं के अनुसार, जीवविज्ञान और रसायन विज्ञान के प्रश्न अपेक्षाकृत सीधे और एनसीईआरटी आधारित थे। अधिकांश बहुविकल्पीय प्रश्न (MCQs), असर्शन-रीजन और केस-स्टडी आधारित प्रश्न पाठ्यपुस्तक से जुड़े थे। वहीं भौतिकी खंड में कुछ संख्यात्मक और विश्लेषणात्मक प्रश्न ऐसे थे, जिन्होंने अवधारणात्मक समझ की परीक्षा ली। कुल मिलाकर पेपर का स्तर “मॉडरेट” माना गया।

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रटने की बजाय समझ पर जोर

शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि बोर्ड ने इस बार स्पष्ट संकेत दिया है कि केवल रटने से काम नहीं चलेगा। प्रश्नों की संरचना इस प्रकार थी कि छात्र को सिद्धांत के साथ उसका अनुप्रयोग भी समझना जरूरी था। इससे उच्च कक्षाओं में विज्ञान की पढ़ाई के लिए मजबूत आधार तैयार होगा।

तैयारी के लिए क्या सीख?

विशेषज्ञों की सलाह है कि भविष्य के परीक्षार्थी एनसीईआरटी पुस्तकों को प्राथमिक स्रोत मानें। अध्यायों की अवधारणाओं को समझते हुए अभ्यास प्रश्नों और पिछले वर्षों के प्रश्नपत्रों का नियमित अभ्यास करें। डायग्राम, सूत्र और महत्वपूर्ण परिभाषाओं की स्पष्ट समझ बेहतर अंक दिला सकती है।

निष्कर्ष

CBSE कक्षा 10 विज्ञान परीक्षा 2026 ने परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता और संरचनात्मक स्पष्टता का उदाहरण पेश किया। सेक्शन-वाइज प्रारूप और कॉन्सेप्ट आधारित प्रश्नों ने छात्रों की वास्तविक समझ को परखा। यह बदलाव शिक्षा व्यवस्था को अधिक विश्लेषणात्मक और व्यावहारिक दिशा में ले जाने की कोशिश माना जा रहा है।

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