ब्रिटेन (United Kingdom) के वेस्ट मिडलैंड्स की 56 वर्षीय Manjit Sangha संघा के साथ घटी घटना ने पालतू जानवरों की देखभाल और घावों की सफाई को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। एक मामूली कट पर उनके पालतू कुत्ते के चाटने के बाद ऐसा संक्रमण फैला कि उन्हें सेप्सिस हो गया और जान बचाने के लिए डॉक्टरों को उनके दोनों हाथ और दोनों पैर काटने पड़े।
24 घंटे में बिगड़ी हालत, कई बार रुकी धड़कन
परिवार के अनुसार, काम से लौटने के बाद Manjit Sangha की तबीयत अचानक बिगड़ी। कुछ ही घंटों में उन्हें तेज बुखार, कमजोरी और भ्रम की स्थिति महसूस हुई। अस्पताल पहुंचने तक संक्रमण तेजी से फैल चुका था और वे सेप्टिक शॉक में चली गईं। इलाज के दौरान उन्हें कई बार कार्डियक अरेस्ट का सामना करना पड़ा। संक्रमण के कारण अंगों में रक्त प्रवाह रुक गया, जिससे डॉक्टरों को जीवन बचाने के लिए अम्प्यूटेशन का कठिन निर्णय लेना पड़ा।
क्या है सेप्सिस और क्यों खतरनाक है?
सेप्सिस तब होता है जब शरीर किसी संक्रमण के खिलाफ अत्यधिक प्रतिक्रिया देता है और यही प्रतिक्रिया अंगों को नुकसान पहुंचाने लगती है। विशेषज्ञों के अनुसार, कुत्तों की लार में कुछ बैक्टीरिया जैसे Capnocytophaga पाए जाते हैं, जो सामान्यतः हानिरहित होते हैं, लेकिन खुले घाव से शरीर में प्रवेश करने पर गंभीर संक्रमण का कारण बन सकते हैं।
लक्षणों में तेज बुखार, ठंड लगना, तेज सांस, हृदय गति बढ़ना, त्वचा का रंग बदलना और मानसिक भ्रम शामिल हैं। समय पर पहचान और तत्काल चिकित्सा उपचार से सेप्सिस को नियंत्रित किया जा सकता है, लेकिन देरी जानलेवा साबित हो सकती है।
32 सप्ताह बाद घर वापसी
लगभग 32 हफ्तों तक अस्पताल में रहने और कई सर्जरी के बाद Manjit Sangha घर लौट पाईं। अब वे कृत्रिम अंगों और पुनर्वास के सहारे नई जिंदगी शुरू कर रही हैं। उन्होंने लोगों से अपील की है कि पालतू जानवरों से प्यार करें, लेकिन खुले घावों को ढककर रखें और किसी भी असामान्य लक्षण को नजरअंदाज न करें।
विशेषज्ञों की सलाह
स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि पालतू जानवरों के साथ रहने में सामान्य स्वच्छता बेहद जरूरी है।
- किसी भी कट या घाव को तुरंत साफ कर ढकें
- पालतू को खुले घाव चाटने न दें
- संक्रमण के लक्षण दिखें तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें
निष्कर्ष
यह मामला दुर्लभ जरूर है, लेकिन यह बताता है कि छोटी लापरवाही भी बड़ी स्वास्थ्य आपदा में बदल सकती है। जागरूकता, स्वच्छता और समय पर इलाज ही सेप्सिस जैसी गंभीर स्थिति से बचाव का सबसे प्रभावी तरीका है।