फ्रांस के राष्ट्रपति Emmanuel Macron ने भारतीय उद्यमी और कंटेंट क्रिएटर Raj Shamani के लोकप्रिय पॉडकास्ट Figuring Out में शामिल होकर भारत-फ्रांस के बीच कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) सहयोग को नई दिशा देने की बात कही। इस बातचीत में तकनीकी संप्रभुता, जिम्मेदार AI, स्टार्टअप सहयोग और वैश्विक डिजिटल संतुलन जैसे मुद्दों पर विस्तार से चर्चा हुई।
यह इंटरव्यू ऐसे समय में सामने आया है जब दुनिया भर में AI को लेकर नीतिगत बहस तेज है और भारत तेजी से डिजिटल इकोसिस्टम का वैश्विक केंद्र बनता जा रहा है।
“ओपन, जिम्मेदार और लोकतांत्रिक AI” पर जोर
मैक्रों ने स्पष्ट किया कि भारत और फ्रांस मिलकर ऐसी AI प्रणाली विकसित करना चाहते हैं जो केवल व्यावसायिक लाभ तक सीमित न रहे, बल्कि समाज के व्यापक हित में काम करे।
उन्होंने कहा कि AI को ओपन-सोर्स, पारदर्शी और नैतिक मानकों के अनुरूप विकसित करना आवश्यक है, ताकि डेटा सुरक्षा और नागरिक अधिकार सुरक्षित रह सकें। फ्रांस की शोध क्षमता और भारत की डिजिटल स्केल — यह संयोजन वैश्विक तकनीकी संतुलन स्थापित कर सकता है।
डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर: भारत मॉडल की सराहना
मैक्रों ने भारत की डिजिटल प्रगति की विशेष प्रशंसा की। उन्होंने कहा कि भारत ने डिजिटल पहचान, फिनटेक और सार्वजनिक सेवाओं के डिजिटलीकरण में जो उपलब्धियां हासिल की हैं, वे कई देशों के लिए मॉडल बन चुकी हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि भारत का डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर (DPI) — जिसमें डिजिटल पहचान, भुगतान और सेवा वितरण प्रणाली शामिल हैं — AI आधारित समाधानों के लिए मजबूत आधार तैयार करता है।
Indo-French Innovation Network: स्टार्टअप्स के लिए नया प्लेटफॉर्म
पॉडकास्ट में मैक्रों ने भारत-फ्रांस स्टार्टअप सहयोग को मजबूत करने के लिए एक साझा नवाचार नेटवर्क की रूपरेखा पर भी चर्चा की।
इस पहल के तहत:
- दोनों देशों के स्टार्टअप्स को संयुक्त रिसर्च अवसर मिलेंगे
- तकनीकी प्रतिभा का आदान-प्रदान बढ़ेगा
- AI, रक्षा, अंतरिक्ष और ऊर्जा जैसे क्षेत्रों में संयुक्त प्रोजेक्ट शुरू हो सकते हैं
यह कदम युवा उद्यमियों और टेक प्रोफेशनल्स के लिए नए अवसर खोल सकता है।
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Year of Innovation 2026: रणनीतिक साझेदारी का विस्तार
भारत और फ्रांस ने 2026 को ‘Year of Innovation’ के रूप में मनाने की योजना बनाई है। इसका उद्देश्य केवल तकनीकी सहयोग नहीं, बल्कि शिक्षा, अनुसंधान और उद्योग के बीच मजबूत तालमेल स्थापित करना है।
विश्लेषकों का मानना है कि यह पहल AI नीति निर्माण, साइबर सुरक्षा और डेटा गवर्नेंस के क्षेत्र में वैश्विक मानक तय करने में भी भूमिका निभा सकती है।
वैश्विक परिप्रेक्ष्य: क्यों महत्वपूर्ण है यह संवाद
AI आज केवल तकनीकी विषय नहीं रहा, बल्कि यह आर्थिक, सामाजिक और रणनीतिक महत्व का मुद्दा बन चुका है। अमेरिका और चीन के बीच तकनीकी प्रतिस्पर्धा के दौर में भारत-फ्रांस साझेदारी एक संतुलित और नैतिक विकल्प के रूप में उभर सकती है।
विशेषज्ञों के अनुसार, यदि यह सहयोग ठोस परियोजनाओं और निवेश में बदलता है, तो आने वाले वर्षों में यूरोप और भारत के बीच तकनीकी व्यापार और शोध सहयोग में उल्लेखनीय वृद्धि देखी जा सकती है।
युवाओं के लिए संदेश
Raj Shamani के सवालों के जवाब में मैक्रों ने युवाओं को नवाचार और शोध के क्षेत्र में आगे आने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि AI के भविष्य को आकार देने में युवा इंजीनियर, डेवलपर और स्टार्टअप संस्थापक अहम भूमिका निभाएंगे।
निष्कर्ष
फ्रांस के राष्ट्रपति का भारतीय पॉडकास्ट पर आना केवल एक कूटनीतिक इशारा नहीं, बल्कि डिजिटल युग की नई साझेदारी का संकेत है। भारत की विशाल डिजिटल क्षमता और फ्रांस की वैज्ञानिक विशेषज्ञता मिलकर AI के क्षेत्र में वैश्विक संतुलन बना सकती है।
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