Indore में पीने के पानी में सीवेज मिलावट से मौतें, ‘भारत का सबसे साफ शहर’ गंभीर जल संकट के घेरे में

भारत का सबसे साफ शहर कहलाने वाला Indore इस समय गंभीर सार्वजनिक स्वास्थ्य संकट से गुजर रहा है। शहर के कई इलाकों में पीने के पानी में सीवेज मिल जाने से अब तक कई लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि सैकड़ों लोग बीमार पड़ चुके हैं। इस घटना ने नगर प्रशासन, जल आपूर्ति व्यवस्था और स्वच्छता के दावों पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं।

कहां से शुरू हुआ संकट: महीनों से आ रही थी बदबू

स्थानीय निवासियों के अनुसार, प्रभावित इलाकों में पिछले कई महीनों से नलों के पानी में बदबू और गंदा स्वाद आ रहा था। लोगों ने इसकी शिकायत नगर निगम और जल आपूर्ति विभाग से की, लेकिन समय रहते ठोस कार्रवाई नहीं की गई

बाद में जांच में सामने आया कि सीवेज लाइन में लीकेज के कारण गंदा पानी पीने के पानी की पाइपलाइन में मिल गया, जिससे संक्रमण तेजी से फैला।

मौतें और बीमारी: आंकड़े क्या कहते हैं

स्वास्थ्य विभाग और स्थानीय प्रशासन से मिली जानकारी के अनुसार:

  • कई लोगों की इलाज के दौरान मौत हो चुकी है
  • सैकड़ों मरीज डायरिया, उल्टी, पेट दर्द और तेज बुखार की शिकायत के साथ अस्पताल पहुंचे
  • कई मरीजों की हालत गंभीर होने के कारण आईसीयू में भर्ती करना पड़ा
  • सबसे ज्यादा असर बुजुर्गों और बच्चों पर देखा गया

डॉक्टरों का कहना है कि यह संक्रमण गंभीर बैक्टीरियल दूषण के कारण फैला, जो सीधे सीवेज से जुड़ा हुआ है।

‘स्वच्छ शहर’ की छवि पर सवाल

Indore लगातार स्वच्छ सर्वेक्षण में देश का सबसे साफ शहर घोषित होता रहा है। लेकिन इस घटना ने साफ कर दिया है कि

साफ सड़कों और कचरा प्रबंधन के बावजूद, सुरक्षित पीने का पानी सुनिश्चित करना अभी भी बड़ी चुनौती है।

विशेषज्ञों का मानना है कि स्वच्छता रैंकिंग में जल गुणवत्ता और स्वास्थ्य सुरक्षा को पर्याप्त महत्व नहीं दिया गया, जिसका खामियाजा अब आम जनता को भुगतना पड़ रहा है।

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प्रशासन की भूमिका और लापरवाही के आरोप

स्थानीय लोगों और सामाजिक संगठनों ने आरोप लगाया है कि:

  • समय रहते शिकायतों को गंभीरता से नहीं लिया गया
  • नियमित पानी की गुणवत्ता जांच नहीं की गई
  • सीवेज और पेयजल पाइपलाइन की निगरानी में लापरवाही बरती गई

घटना के बाद प्रशासन ने कुछ अधिकारियों पर कार्रवाई और जांच के आदेश दिए हैं, लेकिन जनता इसे देरी से उठाया गया कदम बता रही है।

राहत और आपात कदम

घटना सामने आने के बाद प्रशासन ने:

  • प्रभावित इलाकों में टैंकर से साफ पानी की आपूर्ति शुरू की
  • मुफ्त चिकित्सा शिविर लगाए
  • पानी की आपूर्ति अस्थायी रूप से बंद कर लाइन की मरम्मत शुरू की

हालांकि, स्थानीय लोगों का कहना है कि ये कदम पहले उठाए जाने चाहिए थे, ताकि जानें बचाई जा सकतीं।

स्वास्थ्य विशेषज्ञ क्या कह रहे हैं

सार्वजनिक स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार:

  • सीवेज से दूषित पानी जानलेवा बीमारियों को जन्म देता है
  • शहरी इलाकों में पेयजल और सीवेज सिस्टम का अलगाव बेहद जरूरी है
  • नियमित, स्वतंत्र और पारदर्शी जल परीक्षण प्रणाली लागू होनी चाहिए

यह घटना केवल Indore तक सीमित नहीं, बल्कि देश के अन्य शहरों के लिए भी चेतावनी है।

बड़ी तस्वीर: जल सुरक्षा पर राष्ट्रीय बहस की जरूरत

Indore की घटना यह दिखाती है कि

स्वच्छता केवल दिखावे से नहीं, बल्कि सुरक्षित बुनियादी सेवाओं से तय होती है।

तेजी से बढ़ते शहरीकरण के बीच सुरक्षित पीने का पानी एक गंभीर राष्ट्रीय मुद्दा बनता जा रहा है। यदि समय रहते ढांचागत सुधार नहीं किए गए, तो ऐसे संकट भविष्य में और बढ़ सकते हैं।

निष्कर्ष

Indore में हुआ यह हादसा एक कड़वी सच्चाई सामने लाता है कि स्वच्छता पुरस्कार और वास्तविक नागरिक सुरक्षा के बीच बड़ा अंतर हो सकता है।
Indore साफ शहर होने का दावा तभी सार्थक है, जब हर नागरिक को सुरक्षित और शुद्ध पीने का पानी बिना डर के मिल सके।

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