हिंदी सिनेमा के वरिष्ठ फिल्ममेकर M M Baig का निधन हो गया है। उनका शव मुंबई के अंधेरी स्थित आवास पर संदिग्ध परिस्थितियों में मिला। कई दिनों तक घर का दरवाजा न खुलने और दुर्गंध आने के बाद पड़ोसियों ने पुलिस को सूचना दी, जिसके बाद यह घटना सामने आई। इस खबर की पुष्टि उनके पब्लिसिस्ट Hanif Zaveri ने की है।
पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, मौत स्वाभाविक कारणों से हुई प्रतीत होती है, हालांकि अंतिम रिपोर्ट के बाद ही स्थिति स्पष्ट होगी।
कई दिनों तक नहीं दिखे बाहर, पड़ोसियों को हुआ शक
जानकारी के अनुसार, करीब चार से पांच दिनों तक एम.एम. बेग अपने घर से बाहर नहीं निकले। स्थानीय लोगों ने जब घर से दुर्गंध महसूस की तो उन्होंने पुलिस को सूचित किया। पुलिस टीम ने मौके पर पहुंचकर दरवाजा खुलवाया, जहां उनका शव मिला।
बताया जा रहा है कि वे पिछले कुछ समय से स्वास्थ्य समस्याओं से जूझ रहे थे और अपेक्षाकृत एकांत जीवन व्यतीत कर रहे थे।
कौन थे एम.एम. बेग?
M M Baig हिंदी फिल्म उद्योग के अनुभवी फिल्मकारों में गिने जाते थे। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत बतौर सहायक निर्देशक की और बाद में स्वतंत्र रूप से फिल्म निर्माण और निर्देशन किया।
उन्होंने अपने शुरुआती दौर में दिग्गज फिल्मकार J. Om Prakash, Vimal Kumar और Rakesh Roshan के साथ काम किया।
उनकी निर्देशित फिल्मों में Chhoti Bahu विशेष रूप से उल्लेखनीय रही। इसके अलावा उन्होंने Masoom Gawah जैसी परियोजनाओं पर भी काम किया, जिसमें अभिनेता Naseeruddin Shah शामिल थे।
फिल्म इंडस्ट्री में उन्हें एक अनुशासित और संवेदनशील फिल्मकार के रूप में जाना जाता था।
फिल्मी परिवार से जुड़ाव
M M Baig की बेटी शाहिंदा बेग, जिन्हें 1980 के दशक में ‘बेबी गुड्डू’ के नाम से पहचान मिली, ने कई लोकप्रिय फिल्मों में बतौर बाल कलाकार काम किया। वह अपने समय की चर्चित चाइल्ड आर्टिस्ट रही हैं।
M M Baig का फिल्मी परिवार से गहरा संबंध रहा और उन्होंने कई कलाकारों के करियर की शुरुआती दिशा तय करने में मार्गदर्शन भी दिया।
इंडस्ट्री में शोक की लहर
M M Baig के निधन की खबर के बाद फिल्म जगत में शोक की लहर है। कई फिल्मकर्मी और करीबी सहयोगी इस घटना से स्तब्ध हैं। हालांकि आधिकारिक श्रद्धांजलि संदेशों का इंतजार किया जा रहा है।
फिल्म इतिहासकारों का मानना है कि 80 और 90 के दशक में मध्यम बजट की सामाजिक और पारिवारिक फिल्मों के दौर में बेग जैसे फिल्मकारों की महत्वपूर्ण भूमिका रही। उन्होंने व्यावसायिक सिनेमा और पारिवारिक मूल्यों के बीच संतुलन बनाने की कोशिश की।
स्वास्थ्य और अकेलेपन का सवाल
यह घटना एक बार फिर इस सवाल को सामने लाती है कि फिल्म उद्योग से जुड़े वरिष्ठ कलाकारों और तकनीशियनों के लिए सामाजिक और स्वास्थ्य सुरक्षा तंत्र कितना मजबूत है। कई वरिष्ठ कलाकार अकेले रहते हैं और नियमित स्वास्थ्य निगरानी न होने से जोखिम बढ़ जाता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि फिल्म संगठनों और एसोसिएशनों को वरिष्ठ सदस्यों के लिए हेल्थ ट्रैकिंग और नियमित संपर्क व्यवस्था विकसित करनी चाहिए।
निष्कर्ष
M M Baig का निधन हिंदी सिनेमा के एक शांत लेकिन महत्वपूर्ण अध्याय का अंत है। उन्होंने पर्दे के पीछे रहकर कई फिल्मों को आकार दिया और अनेक कलाकारों को मार्गदर्शन प्रदान किया।
उनकी मृत्यु की आधिकारिक रिपोर्ट आने के बाद ही अंतिम कारण स्पष्ट होगा, लेकिन उनका योगदान हिंदी फिल्म उद्योग में लंबे समय तक याद किया जाएगा।