पश्चिम बंगाल की राजनीति में दशकों तक प्रभावशाली भूमिका निभाने वाले वरिष्ठ नेता Mukul Roy का रविवार देर रात निधन हो गया। वे 71 वर्ष के थे और लंबे समय से गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं से जूझ रहे थे। उनके निधन से राज्य की राजनीति में एक युग का अंत माना जा रहा है।
परिवार के अनुसार, वे पिछले कुछ महीनों से कोलकाता के एक निजी अस्पताल में उपचाराधीन थे। देर रात उनकी हालत बिगड़ी और चिकित्सकीय प्रयासों के बावजूद उन्हें बचाया नहीं जा सका।
स्वास्थ्य कारणों से सक्रिय राजनीति से दूरी
करीबी सूत्रों के मुताबिक, Mukul Roy बीते कुछ वर्षों से न्यूरोलॉजिकल समस्याओं, डिमेंशिया और पार्किंसंस जैसी जटिल बीमारियों से जूझ रहे थे। स्वास्थ्य गिरने के बाद उन्होंने सक्रिय राजनीतिक गतिविधियों से लगभग दूरी बना ली थी।
राजनीतिक गलियारों में लंबे समय से यह चर्चा थी कि उनकी सेहत लगातार कमजोर हो रही है।
तृणमूल के रणनीतिकार से राष्ट्रीय राजनीति तक का सफर
Mukul Roy ने अपने राजनीतिक जीवन की शुरुआत युवा कांग्रेस से की थी, लेकिन उनका असली कद तब उभरा जब वे All India Trinamool Congress (टीएमसी) के संस्थापक सदस्यों में शामिल हुए।
वे पार्टी संगठन को बूथ स्तर तक मजबूत करने वाले प्रमुख रणनीतिकारों में गिने जाते थे। राज्यसभा सांसद के रूप में उन्होंने राष्ट्रीय राजनीति में भी सक्रिय भूमिका निभाई।
साल 2012 में वे केंद्र की यूपीए सरकार में रेल राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) बने और रेल मंत्रालय की जिम्मेदारी संभाली।
भाजपा में प्रवेश और फिर वापसी
2017 में उन्होंने टीएमसी से अलग होकर Bharatiya Janata Party (भाजपा) का दामन थाम लिया। बंगाल में भाजपा के विस्तार में उनकी रणनीतिक भूमिका महत्वपूर्ण मानी जाती है।
2021 के विधानसभा चुनाव में वे भाजपा के टिकट पर विधायक बने। हालांकि चुनाव के बाद उन्होंने पुनः टीएमसी में वापसी की, जिससे राजनीतिक विवाद और दल-बदल कानून को लेकर कानूनी लड़ाई भी शुरू हुई।
यह प्रकरण लंबे समय तक अदालतों में चला और राज्य की राजनीति में चर्चा का विषय बना रहा।
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राजनीतिक शैली: संगठन, रणनीति और समीकरण
Mukul Roy को बंगाल की राजनीति में “बैक-रूम स्ट्रेटेजिस्ट” के रूप में जाना जाता था। वे सार्वजनिक भाषणों से अधिक संगठनात्मक प्रबंधन और राजनीतिक समीकरण बनाने के लिए पहचाने जाते थे।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि:
- उन्होंने टीएमसी के शुरुआती विस्तार में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई
- भाजपा को बंगाल में जमीनी स्तर पर संरचना खड़ी करने में रणनीतिक सहायता दी
- दल-बदल की राजनीति के केंद्र में रहने के बावजूद संगठन कौशल के लिए सम्मानित रहे
राजनीतिक विरासत और प्रभाव
Mukul Roy का राजनीतिक जीवन उतार-चढ़ाव से भरा रहा। वे कभी टीएमसी में नंबर दो की स्थिति में माने जाते थे, तो कभी भाजपा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष के रूप में सक्रिय रहे।
उनकी सबसे बड़ी पहचान एक संगठनकर्ता और रणनीतिक दिमाग की रही। पश्चिम बंगाल की वर्तमान राजनीतिक संरचना में उनके योगदान को अनदेखा नहीं किया जा सकता।
राज्य के कई नेताओं ने उनके निधन पर शोक व्यक्त किया है और उन्हें एक अनुभवी राजनेता के रूप में याद किया है, जिन्होंने दशकों तक बंगाल की राजनीति को दिशा दी।
बंगाल की राजनीति में क्या बदलेगा?
राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि Mukul Roy का जाना एक प्रतीकात्मक क्षति है। भले ही वे हाल के वर्षों में सक्रिय नहीं थे, लेकिन उनके अनुभव और नेटवर्क का प्रभाव लंबे समय तक बना रहा।
बंगाल की राजनीति आज भी गठबंधनों, दल-बदल और संगठनात्मक रणनीतियों के इर्द-गिर्द घूमती है — और इन सभी में मुकुल रॉय की भूमिका ऐतिहासिक रूप से महत्वपूर्ण रही है।
निष्कर्ष
Mukul Roy का निधन केवल एक वरिष्ठ नेता का जाना नहीं, बल्कि पश्चिम बंगाल की राजनीतिक रणनीति के एक महत्वपूर्ण अध्याय का समापन है। उन्होंने क्षेत्रीय राजनीति को राष्ट्रीय विमर्श से जोड़ने में भूमिका निभाई और संगठनात्मक राजनीति की एक अलग शैली प्रस्तुत की।
उनकी राजनीतिक यात्रा आने वाली पीढ़ियों के लिए अध्ययन और विश्लेषण का विषय रहेगी।
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