‘ऑपरेशन गज़ब लिल-हक’ के तहत कार्रवाई का दावा, काबुल-कंधार समेत कई इलाकों में धमाके
Pakistan और अफगानिस्तान के बीच संबंधों में एक बार फिर गंभीर तनाव पैदा हो गया है। पाकिस्तानी वायुसेना ने अफगानिस्तान के कई शहरों में हवाई हमले किए हैं। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, इन हमलों में राजधानी काबुल, कंधार और पक्तिका प्रांत के कुछ ठिकानों को निशाना बनाया गया। पाकिस्तान ने इस कार्रवाई को आतंकवाद विरोधी अभियान बताया है।
पाकिस्तानी अधिकारियों के मुताबिक यह कार्रवाई ‘ऑपरेशन गज़ब लिल-हक’ के तहत की गई, जिसका उद्देश्य उन आतंकी ठिकानों को नष्ट करना था जो पाकिस्तान में हमलों की साजिश रच रहे थे। इस्लामाबाद का दावा है कि एयरस्ट्राइक में कई उग्रवादियों को मार गिराया गया और हथियारों के ठिकानों को नुकसान पहुंचाया गया है। हालांकि स्वतंत्र स्रोतों से इन दावों की पुष्टि नहीं हो पाई है।
अफगानिस्तान का कड़ा विरोध, जवाबी कार्रवाई का दावा
अफगानिस्तान की तालिबान सरकार ने इन हमलों को अपनी संप्रभुता का उल्लंघन बताया है। काबुल ने कहा कि Pakistan ने बिना किसी औपचारिक सूचना के हवाई कार्रवाई की, जिससे नागरिक इलाकों में भी दहशत फैल गई। अफगान पक्ष का कहना है कि सीमा पर तैनात उनकी सुरक्षा बलों ने जवाबी कार्रवाई की है और कुछ पाकिस्तानी चौकियों को निशाना बनाया गया।
सीमा के संवेदनशील तोरखम और डूरंड लाइन क्षेत्र में गोलाबारी और भारी हथियारों के इस्तेमाल की खबरें सामने आई हैं। स्थानीय सूत्रों के अनुसार, संघर्ष के कारण सीमावर्ती गांवों से लोगों का अस्थायी पलायन भी शुरू हो गया है।
पृष्ठभूमि: क्यों बढ़ा टकराव?
विशेषज्ञों का मानना है कि पिछले कुछ महीनों से सीमा पार हमलों और उग्रवादी गतिविधियों को लेकर दोनों देशों के बीच अविश्वास बढ़ता गया है। Pakistan लंबे समय से आरोप लगाता रहा है कि अफगान धरती का इस्तेमाल उसके खिलाफ आतंकी गतिविधियों के लिए किया जा रहा है, जबकि अफगान प्रशासन इन आरोपों को खारिज करता रहा है।
राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, यह ताजा कार्रवाई क्षेत्रीय स्थिरता के लिए गंभीर चुनौती बन सकती है। दोनों देश आर्थिक संकट और आंतरिक सुरक्षा समस्याओं से जूझ रहे हैं, ऐसे में सीमा संघर्ष से हालात और बिगड़ने की आशंका है।
अंतरराष्ट्रीय समुदाय की चिंता
संयुक्त राष्ट्र और कई देशों ने दोनों पक्षों से संयम बरतने और संवाद के जरिए विवाद सुलझाने की अपील की है। कूटनीतिक हल न निकलने की स्थिति में यह संघर्ष व्यापक क्षेत्रीय अस्थिरता का कारण बन सकता है।
स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है। आने वाले दिनों में दोनों देशों की आधिकारिक प्रतिक्रियाएं और जमीनी हालात इस संकट की दिशा तय करेंगे।
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