राज्यसभा चुनाव 2026 से पहले TMC ने अपने उम्मीदवारों की सूची जारी कर दी है। पार्टी प्रमुख Mamata Banerjee ने चार प्रमुख चेहरों को मैदान में उतारकर स्पष्ट संकेत दिया है कि पार्टी संसद के उच्च सदन में विविध और प्रभावशाली प्रतिनिधित्व चाहती है। पश्चिम बंगाल से इस बार पांच सीटें रिक्त हो रही हैं, जिनमें से चार पर टीएमसी की जीत लगभग तय मानी जा रही है।
कौन-कौन हैं उम्मीदवार?
TMC ने जिन नामों की घोषणा की है, उनमें राजनीति, प्रशासन, विधि और संस्कृति जगत से जुड़े चेहरे शामिल हैं:
- Babul Supriyo – पूर्व केंद्रीय मंत्री और वर्तमान में टीएमसी के प्रमुख नेताओं में शामिल। भाजपा से अलग होकर टीएमसी में आए बाबुल सुप्रियो को संगठनात्मक और संसदीय अनुभव का लाभ है।
- Rajeev Kumar – पश्चिम बंगाल के पूर्व पुलिस महानिदेशक, जिनका प्रशासनिक अनुभव पार्टी के लिए रणनीतिक रूप से अहम माना जा रहा है।
- Menaka Guruswamy – सुप्रीम कोर्ट की वरिष्ठ अधिवक्ता और संवैधानिक मामलों की विशेषज्ञ।
- Koel Mallick – बंगाली फिल्म उद्योग की लोकप्रिय अभिनेत्री, जिनकी सामाजिक पहुंच व्यापक है।
राजनीतिक संदेश क्या है?
विश्लेषकों का मानना है कि यह सूची केवल औपचारिक घोषणा नहीं, बल्कि स्पष्ट राजनीतिक रणनीति का हिस्सा है। एक ओर बाबुल सुप्रियो जैसे अनुभवी नेता हैं, तो दूसरी ओर मेनका गुरुस्वामी जैसी विधि विशेषज्ञ, जिनकी पहचान संवैधानिक अधिकारों से जुड़े महत्वपूर्ण मामलों में रही है। इससे टीएमसी यह संदेश देना चाहती है कि वह संसद में नीतिगत बहस को मजबूत करना चाहती है।
साथ ही, कोयल मल्लिक को उम्मीदवार बनाकर पार्टी ने सांस्कृतिक और जनसंपर्क के आयाम को भी साधने की कोशिश की है। राजीव कुमार का प्रशासनिक अनुभव कानून-व्यवस्था और शासन के मुद्दों पर पार्टी की पकड़ को दर्शाता है।
ये भी पढ़े: दिल्ली आबकारी नीति केस में Arvind Kejriwal को कोर्ट से राहत: सियासत में नए समीकरणों की आहट
विधानसभा गणित और आगे की राह
पश्चिम बंगाल विधानसभा में TMC के पास स्पष्ट बहुमत है, जिसके चलते चार सीटों पर उसकी स्थिति मजबूत मानी जा रही है। एक सीट पर विपक्षी Bharatiya Janata Party की दावेदारी संभव है।
राजनीतिक विशेषज्ञों के अनुसार, राज्यसभा में मजबूत उपस्थिति से TMC को राष्ट्रीय स्तर पर विपक्षी राजनीति में प्रभाव बढ़ाने का अवसर मिलेगा। आने वाले चुनावी सत्र में इन नामों की जीत औपचारिकता मानी जा रही है, लेकिन इससे संसद में पार्टी की भूमिका और अधिक सक्रिय हो सकती है।
राज्यसभा चुनाव का परिणाम यह तय करेगा कि संसद के उच्च सदन में क्षेत्रीय दलों की आवाज कितनी प्रभावशाली होगी और राष्ट्रीय मुद्दों पर उनकी भूमिका किस दिशा में जाएगी।