पश्चिम बंगाल में आगामी विधानसभा चुनाव से पहले सुरक्षा तैयारियां तेज हो गई हैं। राज्य के मुख्य निर्वाचन अधिकारी Manoj Agarwal ने स्पष्ट किया है कि केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल केवल औपचारिक गश्त तक सीमित नहीं रहेंगे, बल्कि आवश्यकता पड़ने पर कानून-व्यवस्था बनाए रखने में सक्रिय भूमिका निभाएंगे। उनका यह बयान ऐसे समय आया है जब मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण और राजनीतिक बयानबाजी के कारण माहौल संवेदनशील बना हुआ है।
केंद्रीय बल ‘सक्रिय मोड’ में, सिर्फ तैनाती नहीं
मुख्य निर्वाचन अधिकारी Manoj Agarwal ने कहा कि जिला प्रशासन और पुलिस अधीक्षक की मांग पर केंद्रीय बलों को संवेदनशील क्षेत्रों में सीधे तैनात किया जा सकता है। उद्देश्य स्पष्ट है—मतदान प्रक्रिया को निष्पक्ष, पारदर्शी और भयमुक्त बनाना। चुनाव आयोग का मानना है कि प्रारंभिक चरण में ही सख्त निगरानी से संभावित तनाव को रोका जा सकता है।
सूत्रों के अनुसार, बड़ी संख्या में CAPF कंपनियों की चरणबद्ध तैनाती की योजना है। सीमावर्ती और पूर्व में संवेदनशील रहे जिलों में विशेष निगरानी रखी जाएगी। यह रणनीति पिछले चुनावों के अनुभवों और सुरक्षा आकलन पर आधारित बताई जा रही है।
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मतदाता सूची पर फोकस, पारदर्शिता पर जोर
विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के बाद संशोधित मतदाता सूची जारी करने की प्रक्रिया अंतिम चरण में है। जिन नामों और दस्तावेजों में तकनीकी विसंगतियां पाई गई हैं, उनकी जांच के लिए न्यायिक अधिकारियों की मदद ली जा रही है। निर्वाचन कार्यालय का दावा है कि किसी भी पात्र मतदाता का नाम बिना उचित कारण हटाया नहीं जाएगा।
राजनीतिक दलों ने भी मतदाता सूची को लेकर अपनी-अपनी चिंताएं जताई हैं। मुख्यमंत्री Mamata Banerjee ने कहा है कि वैध मतदाताओं के अधिकारों की रक्षा की जाएगी, जबकि विपक्ष के नेता Suvendu Adhikari ने सुरक्षा और सूची की पारदर्शिता को लेकर सवाल उठाए हैं। इस पृष्ठभूमि में आयोग का सख्त रुख चुनावी प्रक्रिया को विश्वसनीय बनाने की दिशा में अहम माना जा रहा है।
क्यों अहम है यह बयान?
विशेषज्ञों का मानना है कि केंद्रीय बलों की सक्रिय भूमिका का संकेत संभावित विवादों को पहले ही नियंत्रित करने की रणनीति है। पश्चिम बंगाल जैसे राजनीतिक रूप से संवेदनशील राज्य में सुरक्षा व्यवस्था चुनाव की निष्पक्षता का प्रमुख आधार होती है।
चुनाव आयोग का यह संदेश स्पष्ट है—कानून-व्यवस्था से किसी भी प्रकार का समझौता नहीं होगा। पारदर्शी मतदाता सूची, न्यायिक निगरानी और केंद्रीय बलों की तत्पर तैनाती के जरिए प्रशासन यह भरोसा दिलाना चाहता है कि हर मतदाता बिना भय के अपने मताधिकार का प्रयोग कर सके।