टाटा ग्रुप ने Air India और उसकी लो-कॉस्ट सहायक कंपनी एयर इंडिया एक्सप्रेस के लिए नए शीर्ष अधिकारियों की खोज शुरू कर दी है, क्योंकि मौजूदा सीईओ-कम एमडी कैंपबेल विल्सन का कार्यकाल अगले साल खत्म हो रहा है और एयर इंडिया एक्सप्रेस के एमडी आलोक सिंह का कार्यकाल 2027 में पूरा होगा। सूत्रों के मुताबिक, दोनों पक्ष 2027 के बाद कॉन्ट्रैक्ट रिन्यू न करने के पक्ष में हैं, इसलिए समूह ने बाज़ार से नए उम्मीदवारों की तलाश समय से पहले शुरू कर दी है ताकि ट्रांज़िशन स्मूद रहे।
Air India के लिए नया ‘कैप्टन’ कौन?
- टाटा ग्रुप ऐसे नए सीईओ की तलाश में है जो Air India के अगले फेज़ – ग्लोबल एक्सपैंशन, सर्विस क्वालिटी और प्रॉफिटेबिलिटी – को तेज़ी से आगे बढ़ा सके।
- कैंपबेल विल्सन को जुलाई 2022 में एयर इंडिया का सीईओ और एमडी बनाया गया था, जब टाटा ने जनवरी 2022 में सरकारी स्वामित्व से एयरलाइन का अधिग्रहण किया था।
- रिपोर्ट्स के अनुसार विल्सन का कॉन्ट्रैक्ट जून 2027 तक है, लेकिन बोर्ड स्तर पर उनके उत्तराधिकारी की तलाश शुरू हो चुकी है और बदलाव 2027 से पहले भी संभव माना जा रहा है।
- सूत्रों का अनुमान है कि नए सीईओ का चयन करने की प्रक्रिया 3 से 6 महीने तक चल सकती है, और यदि आउटगोइंग व इनकमिंग सीईओ के बीच कुछ समय का ओवरलैप रखा जाता है तो हैंडओवर अपेक्षाकृत आसान होगा।
Air India एक्सप्रेस में भी नई कमान की तैयारी
- टाटा के इस रिव्यू में केवल फुल-सर्विस Air India ही नहीं, बल्कि बजट कैरियर Air India एक्सप्रेस भी शामिल है, जहां मौजूदा एमडी आलोक सिंह का कार्यकाल 2027 में समाप्त होना है।
- सूत्रों के मुताबिक, Air India एक्सप्रेस के लिए भी नए मैनेजिंग डायरेक्टर की तलाश शुरू कर दी गई है, ताकि लो-कॉस्ट सेगमेंट में नेटवर्क विस्तार, रूट ऑप्टिमाइजेशन और यूनिट कॉस्ट कम करने की रणनीति को और आक्रामक रूप से लागू किया जा सके।
- टाटा समूह का लक्ष्य दोनों ब्रांडों – फुल सर्विस और लो-कॉस्ट – को एक समन्वित स्ट्रैटेजी के तहत चलाना है, जिसके लिए नया नेतृत्व की-रोल निभाएगा।
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दुर्घटनाओं, जांच और रेगुलेटर की सख्ती के बाद दबाव
- Air India पर जून में हुए घातक क्रैश के बाद सेफ्टी और ऑपरेशनल प्रैक्टिस पर रेगुलेटरी जांच काफी बढ़ गई है; इस हादसे में 260 लोगों की जान गई थी जो पिछले एक दशक में सबसे गंभीर एविएशन दुर्घटनाओं में से एक मानी जा रही है।
- जांच के दौरान आपात उपकरणों की जांच के बिना उड़ान, इंजन पार्ट रिप्लेसमेंट में देरी, मेंटेनेंस रिकॉर्ड में कथित हेरफेर और क्रू थकान प्रबंधन में कमी जैसे मुद्दे सामने आए, जिन पर रेगुलेटर ने सख्त आपत्तियां दर्ज की हैं।
- एविएशन एक्सपर्ट्स का मानना है कि नया नेतृत्व सेफ्टी गवर्नेंस, टेक्निकल ऑडिट और इंटरनल कंट्रोल्स को और मजबूत करेगा, ताकि एयर इंडिया की इमेज और रेगुलेटरी कॉम्प्लायंस दोनों बेहतर हो सकें।
यात्रियों, कर्मचारियों और मार्केट के लिए इसका मतलब क्या?
- यात्रियों के लिए
- नया मैनेजमेंट ऑन-टाइम परफॉर्मेंस, सेफ्टी रिकॉर्ड और इन-फ्लाइट सर्विस में सुधार को टॉप प्रायोरिटी बना सकता है, जिससे फ्लाइट डिले, कैंसिलेशन और शिकायतों की संख्या कम होने की उम्मीद है।
- डिजिटल चेक-इन, कस्टमर सपोर्ट और लॉयल्टी प्रोग्राम्स में भी अपग्रेड की संभावना है, क्योंकि टाटा एयर इंडिया को ग्लोबल स्टैंडर्ड के बराबर लाने की दिशा में लगातार निवेश कर रहा है।
- कर्मचारियों के लिए
- नए नेतृत्व के साथ परफॉर्मेंस-बेस्ड कल्चर, अपस्किलिंग प्रोग्राम और बेहतर करियर पाथिंग पर ज्यादा फोकस देखने को मिल सकता है, खासकर पायलट, केबिन क्रू और टेक्निकल स्टाफ के लिए।
- साथ ही, रीस्ट्रक्चरिंग, रोल रीडिज़ाइन और केपीआई-ड्रिवन असेसमेंट जैसे कदम भी तेज़ हो सकते हैं, जो कुछ कर्मचारियों के लिए अवसर और कुछ के लिए चुनौती बन सकते हैं।
- मार्केट और इंडस्ट्री के लिए
- टाटा ग्रुप पहले ही Air India और विस्तारा के कंसोलिडेशन और सिंगापुर एयरलाइंस की हिस्सेदारी वाली स्ट्रक्चर पर काम कर रहा है, ऐसे में नया नेतृत्व पूरे एविएशन पोर्टफोलियो के इंटीग्रेशन की रफ्तार तय करेगा।
- ग्लोबल एयरलाइंस से टॉप टैलेंट लाने की कोशिश सफल होती है तो इंटरनेशनल रूट्स पर प्रतियोगिता और प्राइसिंग डायनेमिक्स पर भी असर पड़ सकता है, जिसका सीधा असर इंडियन एविएशन मार्केट पर दिखाई देगा।
आगे की रणनीति – टर्नअराउंड से आगे का सफर
- 2022 में अधिग्रहण के बाद से टाटा ग्रुप ने Air India के लिए फाइव-ईयर टर्नअराउंड प्लान पर काम किया, जिसमें फ्लीट रिन्यूअल, ऑर्डर बुक, रूट नेटवर्क और ब्रांड रिफ्रेश जैसे कदम शामिल हैं, लेकिन प्रॉफिटेबिलिटी और ऑपरेशनल एक्सीलेंस अभी भी वर्क-इन-प्रोग्रेस है।
- नए नेतृत्व से उम्मीद है कि वह टर्नअराउंड मोड से आगे बढ़कर एयर इंडिया को लंबे समय के लिए स्थायी मुनाफे, ग्लोबल कनेक्टिविटी और प्रीमियम ब्रांड पोजिशनिंग की दिशा में ले जाएगा।
- लीडरशिप चेंज, सेफ्टी फोकस और नेटवर्क स्ट्रैटेजी – इन तीनों को मिलाकर देखा जाए तो साफ है कि टाटा ग्रुप अब एयर इंडिया को सिर्फ ‘रिवाइवल स्टोरी’ नहीं बल्कि ‘ग्लोबल प्लेयर’ बनाने की तैयारी में है।
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