हुब्बल्ली :
कर्नाटक के हुब्बल्ली शहर में एक भाजपा महिला कार्यकर्ता के साथ कथित पुलिस दुर्व्यवहार का मामला अब राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर गंभीर बहस का विषय बन गया है। इसी क्रम में भारतीय जनता पार्टी महिला मोर्चा की प्रदेश अध्यक्ष C Manjula ने संबंधित महिला कार्यकर्ता के घर जाकर उनसे मुलाकात की और पूरी पार्टी की ओर से समर्थन व्यक्त किया।
इस दौरान उन्होंने घटना को महिलाओं की गरिमा और अधिकारों पर सीधा हमला बताते हुए राज्य सरकार और पुलिस प्रशासन की भूमिका पर सवाल खड़े किए।
क्या है पूरा मामला
जानकारी के अनुसार, हाल ही में एक राजनीतिक विरोध प्रदर्शन के दौरान हुब्बल्ली में भाजपा महिला कार्यकर्ताओं की गिरफ्तारी की गई थी। आरोप है कि इस दौरान एक महिला कार्यकर्ता के साथ अनुचित व्यवहार किया गया, जिसमें उनकी गरिमा को ठेस पहुँचने की बात कही जा रही है।
घटना से जुड़े कथित वीडियो सामने आने के बाद यह मामला और गंभीर हो गया, जिसके बाद राजनीतिक प्रतिक्रियाएँ तेज हो गईं।
प्रदेश महिला मोर्चा अध्यक्ष C Manjula ने उठाए सवाल
भाजपा महिला मोर्चा की प्रदेश अध्यक्ष C Manjula ने पीड़िता से मुलाकात के बाद कहा कि
“यदि पुलिस कार्रवाई के दौरान किसी महिला की गरिमा को ठेस पहुँचती है, तो यह सिर्फ एक राजनीतिक मुद्दा नहीं बल्कि संवैधानिक और मानवीय चिंता का विषय है।”
उन्होंने आरोप लगाया कि राज्य में महिलाओं की सुरक्षा को लेकर सरकार की नीतियाँ सिर्फ कागज़ों तक सीमित रह गई हैं। उन्होंने इस मामले में निष्पक्ष और स्वतंत्र जांच की मांग की।
राष्ट्रीय महिला आयोग और मानवाधिकार आयोग तक पहुँचा मामला
यह मामला अब केवल स्थानीय स्तर तक सीमित नहीं रहा है।
- राष्ट्रीय महिला आयोग (NCW) ने कथित घटनाक्रम का स्वतः संज्ञान लेते हुए कर्नाटक पुलिस से विस्तृत रिपोर्ट तलब की है।
- वहीं भाजपा की वरिष्ठ महिला नेताओं ने राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) से भी हस्तक्षेप की मांग की है।
आयोगों से अपेक्षा की जा रही है कि वे महिला अधिकारों की रक्षा के लिए निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करें।
अन्य महिला कार्यकर्ता की तबीयत बिगड़ी, अस्पताल में भर्ती
इस घटनाक्रम से जुड़ी एक अन्य भाजपा महिला कार्यकर्ता को भी पुलिस हिरासत के दौरान स्वास्थ्य संबंधी परेशानी होने की जानकारी सामने आई है, जिसके बाद उन्हें हुब्बल्ली के एक सरकारी अस्पताल में भर्ती कराया गया। फिलहाल उनकी स्थिति स्थिर बताई जा रही है।
राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप तेज
भाजपा ने इस पूरे मामले को राज्य सरकार की विफलता बताते हुए कहा है कि पुलिस का इस्तेमाल राजनीतिक दबाव के तहत किया जा रहा है। वहीं सत्तारूढ़ पक्ष ने इन आरोपों को निराधार बताते हुए कहा है कि कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए कार्रवाई की गई।
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विश्लेषण: महिला अधिकार बनाम सत्ता की जवाबदेही
विशेषज्ञों का मानना है कि यह मामला केवल राजनीतिक नहीं है, बल्कि यह महिलाओं के साथ पुलिस व्यवहार, संवैधानिक मर्यादा और जवाबदेही से जुड़ा हुआ है।
लोकतंत्र में विरोध का अधिकार और कानून प्रवर्तन के बीच संतुलन बनाए रखना आवश्यक है, विशेषकर जब मामला महिलाओं से जुड़ा हो।
आगे क्या
अब सभी की नजरें राष्ट्रीय महिला आयोग और मानवाधिकार आयोग की रिपोर्ट पर टिकी हैं। यह देखना अहम होगा कि जांच के बाद क्या कार्रवाई होती है और क्या पीड़ित महिला को न्याय मिल पाता है।
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