बारामती में राजनीतिक हलचल: NCP में Sunetra Pawar को उपमुख्यमंत्री बनाए जाने की मांग तेज

महाराष्ट्र में राष्ट्रीय कांग्रेस पार्टी (NCP) के वरिष्ठ नेता और उपमुख्यमंत्री अजित पवार के विमान हादसे में निधन के बाद से राजनीतिक परिदृश्य बदल रहा है। पार्टी में अब Sunetra Pawar को राज्य का उपमुख्यमंत्री बनाए जाने की मांग जोर पकड़ती दिख रही है। इसके साथ ही बारामती विधानसभा सीट के उपचुनाव को लेकर भी राजनीतिक रणनीति पर विचार हो रहा है।

Sunetra Pawar को उपमुख्यमंत्री बनाने की मांग क्यों?

एनसीपी के कई वरिष्ठ नेताओं और समर्थकों ने स्पष्ट किया है कि Sunetra Pawar राज्य की राजनीतिक स्थिरता बनाए रखने में सक्षम हैं। उनके समर्थकों का मानना है कि वे न केवल पार्टी की विरासत को संभाल सकती हैं, बल्कि महाराष्ट्र के विकास एजेंडे में भी प्रभावी भूमिका निभा सकती हैं।

पार्टी insiders के मुताबिक, सुनेत्रा पवार को उपमुख्यमंत्री पद देने से पार्टी में एकजुटता का संदेश जाएगा और पार्टी कार्यकर्ताओं में सकारात्मक ऊर्जा पैदा होगी।

बारामती उपचुनाव: परिवारिक प्रवेश या रणनीतिक निर्णय?

अजित पवार की मौत के बाद बारामती विधानसभा सीट रिक्त हो गई है, जिसके चलते उपचुनाव होने वाला है। राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि NCP के लिए यह सीट केवल एक चुनावी क्षेत्र नहीं, बल्कि पारिवारिक प्रतिष्ठा का प्रतीक भी है।

पार्टी नेतृत्व के बीच यह विचार भी सामने आ रहा है कि Sunetra Pawar को उपचुनाव में उतारना चाहिए या उनके किसी पुत्र— जैसे पार्थ पवार या जय पवार— को टिकट दिया जाना चाहिए।

विश्लेषकों के अनुसार, यदि Sunetra Pawar को टिकट मिलता है, तो यह NCP की स्थिरता और नैतिक जवाबदेही का संदेश देगा, जबकि यदि किसी भाई या पुत्र को टिकट मिलता है, तो यह पार्टी की राजनीतिक विरासत को आगे बढ़ाने की रणनीति मानी जाएगी।

राजनीतिक विश्लेषण: विरासत बनाम स्थिरता

राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि बारामती की सीट पर NCP की पकड़ मजबूत है, लेकिन नेतृत्व के चयन से यह तय होगा कि आगे पार्टी किस दिशा में जाए।

कुछ विशेषज्ञ कहते हैं कि Sunetra Pawar को उपमुख्यमंत्री बनाकर और वह अगर उपचुनाव में खड़ी होती हैं, तो इससे पार्टी और जनता के बीच भावनात्मक जुड़ाव मजबूत होगा। वहीं, कुछ का मानना है कि युवाओं को आगे लाने से पार्टी के दीर्घकालिक विकास की नींव मजबूत होगी।

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पार्टी के भीतर उठ रहे विचार

एनसीपी के भीतर यह भी विचार सुनने को मिल रहा है कि सिर्फ उपमुख्यमंत्री पद देना ही पर्याप्त नहीं होगा, बल्कि सुनेत्रा पवार को महत्वपूर्ण निर्णयों में शामिल कर उनकी भूमिका को और विस्तारित किया जाना चाहिए, ताकि पार्टी की राजनीति में उनका प्रभाव और बढ़े।

कुछ नेताओं ने सुझाव दिया है कि सुनेत्रा पवार को कैबिनेट के अन्य विभागों में भी प्रमुख जिम्मेदारी दी जाए, जिससे उनकी राजनीतिक क्षमता और नेतृत्व कौशल दोनों को संतुलित रूप से आगे बढ़ाया जा सके।

जनता का रुख और स्थानीय समर्थन

बारामती में सुनेत्रा पवार को लेकर जनता में गहरा समर्थन दिखाई दे रहा है। स्थानीय NCP कार्यकर्ताओं और समर्थकों का कहना है कि सुनेत्रा पवार निर्णय लेने में कुशल हैं और पार्टी की प्राथमिकताओं को समझती हैं।

वहीं, विपक्षी दलों ने भी इस मामले पर अपनी प्रतिक्रिया दी है। कुछ नेताओं ने कहा है कि NCP को पारिवारिक राजनीति से ऊपर उठकर विकास मुद्दों पर फोकस करना चाहिए, जिससे राज्य के व्यापक हितों को सुरक्षित रखा जा सके।

आगे क्या?

अभी तक NCP नेतृत्व की ओर से Sunetra Pawar को उपमुख्यमंत्री पद दिए जाने या बारामती उपचुनाव में उन्हें घोषित उम्मीदवार बनाने के संबंध में कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है। राजनीतिक हलचल और उच्चस्तरीय बैठकों के बाद ही अंतिम निर्णय लिया जाएगा।

विश्लेषकों का अनुमान है कि आने वाले कुछ दिनों में पार्टी इस पर स्पष्ट रुख अपना सकती है, जिससे महाराष्ट्र की राजनीतिक दिशा पर असर पड़ेगा।

निष्कर्ष

अजित पवार के निधन के बाद NCP के सामने नेतृत्व और उत्तराधिकारी चयन की प्रमुख चुनौती है। Sunetra Pawar के नाम पर समर्थन और राजनीतिक सोच से यह स्पष्ट है कि पार्टी परिवारिक विरासत और स्थिर नेतृत्व दोनों को संतुलित करने का प्रयास कर रही है। अब यह देखने की बात है कि NCP इस ऐतिहासिक मोड़ पर क्या निर्णय लेती है और उसका राज्य स्तर पर राजनीतिक प्रभाव कैसा दिखाई देता है।

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