अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी NASA ने अपने अब तक के सबसे उन्नत सुपरकंप्यूटिंग सिस्टम ‘अथेना (Athena)’ को आधिकारिक रूप से ऑनलाइन कर दिया है। यह सुपरकंप्यूटर अब NASA के एम्स रिसर्च सेंटर स्थित मॉड्यूलर सुपरकंप्यूटिंग फैसिलिटी में पूरी तरह सक्रिय है और एजेंसी के वैज्ञानिक अनुसंधान को नई ऊंचाइयों तक ले जाने के लिए तैयार है।
NASA के अनुसार, अथेना को खास तौर पर अत्यधिक जटिल वैज्ञानिक गणनाओं, अंतरिक्ष मिशनों की सटीक सिमुलेशन और विशाल डेटा प्रोसेसिंग की जरूरतों को ध्यान में रखकर डिजाइन किया गया है।
क्या है ‘अथेना’ और क्यों है यह खास
अथेना सुपरकंप्यूटर की कुल कंप्यूटिंग क्षमता 20 पेटाफ्लॉप से अधिक है, यानी यह प्रति सेकंड लगभग 20 क्वाड्रिलियन गणनाएं करने में सक्षम है। यह क्षमता इसे NASA के पुराने सुपरकंप्यूटर सिस्टम्स की तुलना में कहीं अधिक तेज और प्रभावशाली बनाती है।
इस सिस्टम में आधुनिक प्रोसेसर, बड़ी मेमोरी क्षमता और हाई-स्पीड नेटवर्किंग का इस्तेमाल किया गया है, जिससे बड़े पैमाने पर डेटा-आधारित रिसर्च को बहुत कम समय में पूरा किया जा सकता है।
पुराने सिस्टम की जगह लेगा ‘अथेना’
NASA ने स्पष्ट किया है कि अथेना, एजेंसी के लंबे समय से उपयोग में रहे सुपरकंप्यूटर ‘प्लेयाड्स’ का स्थान लेगा। प्लेयाड्स ने वर्षों तक NASA के कई अहम मिशनों में अहम भूमिका निभाई, लेकिन बढ़ती तकनीकी जरूरतों के चलते एक अधिक शक्तिशाली सिस्टम की आवश्यकता महसूस की जा रही थी।
अथेना इसी आवश्यकता का जवाब है, जो भविष्य के मिशनों को ध्यान में रखते हुए विकसित किया गया है।
NASA के मिशनों को कैसे मिलेगा फायदा
NASA के वैज्ञानिकों के अनुसार, अथेना का उपयोग कई अहम क्षेत्रों में किया जाएगा, जिनमें शामिल हैं:
- रॉकेट और स्पेसक्राफ्ट के डिज़ाइन व सिमुलेशन
- भविष्य के अंतरिक्ष अभियानों की योजना और जोखिम विश्लेषण
- पृथ्वी और अंतरिक्ष से जुड़े जलवायु मॉडल
- आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और मशीन लर्निंग आधारित शोध
- एयरोस्पेस इंजीनियरिंग में नई तकनीकों का परीक्षण
जहां पहले कुछ सिमुलेशन पूरे करने में कई दिन या सप्ताह लग जाते थे, वहीं अब वही काम घंटों में संभव हो सकेगा।
ऊर्जा दक्षता पर भी खास ध्यान
NASA का कहना है कि अथेना को केवल ताकतवर ही नहीं, बल्कि ऊर्जा-कुशल भी बनाया गया है। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि उच्च प्रदर्शन के साथ-साथ बिजली की खपत और संचालन लागत को भी नियंत्रित रखा जा सके।
यह पहल NASA की उस रणनीति का हिस्सा है, जिसमें अत्याधुनिक तकनीक के साथ सतत और जिम्मेदार संसाधन उपयोग को प्राथमिकता दी जा रही है।
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वैज्ञानिक समुदाय के लिए खुला रहेगा उपयोग
NASA ने यह भी स्पष्ट किया है कि अथेना का इस्तेमाल केवल एजेंसी के भीतर ही सीमित नहीं रहेगा। जरूरत के अनुसार विश्वविद्यालयों, शोध संस्थानों और बाहरी वैज्ञानिकों को भी इस सुपरकंप्यूटर की कंप्यूटिंग क्षमता तक पहुंच दी जा सकती है, जिससे वैश्विक स्तर पर वैज्ञानिक सहयोग को बढ़ावा मिलेगा।
भविष्य की अंतरिक्ष खोजों की नींव
विशेषज्ञों का मानना है कि अथेना जैसे सुपरकंप्यूटर आने वाले वर्षों में NASA को चंद्रमा, मंगल और उससे आगे के मिशनों की बेहतर योजना बनाने में मदद करेंगे। सटीक सिमुलेशन और डेटा विश्लेषण से मिशनों की सफलता की संभावना बढ़ेगी और जोखिम कम होंगे।
निष्कर्ष
NASA का सुपरकंप्यूटर अथेना केवल एक तकनीकी अपग्रेड नहीं है, बल्कि यह अंतरिक्ष विज्ञान और शोध के क्षेत्र में एक बड़ा कदम है। इसकी मदद से NASA न सिर्फ अपने मौजूदा मिशनों को और प्रभावी बना पाएगा, बल्कि भविष्य की अंतरिक्ष खोजों के लिए भी मजबूत आधार तैयार करेगा।
अथेना के ऑनलाइन होने के साथ ही यह स्पष्ट हो गया है कि आने वाले समय में अंतरिक्ष अनुसंधान तेज़, सटीक और पहले से कहीं अधिक डेटा-केंद्रित होने वाला है।
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