भारत में 2026 के दौरान Gold की कुल मांग में गिरावट देखने को मिल सकती है। ताजा रिपोर्ट्स और बाजार विश्लेषण के मुताबिक, सोने की ऊंची कीमतों के चलते आभूषणों की बिक्री प्रभावित हुई है, जिसका सीधा असर कुल खपत पर पड़ रहा है। विशेषज्ञ मानते हैं कि आने वाले महीनों में सोने का बाजार पारंपरिक खरीद से हटकर निवेश केंद्रित होता दिखाई देगा।
ज्वेलरी बिक्री में गिरावट, मांग पर सबसे बड़ा असर
पिछले एक वर्ष में Gold की कीमतों में तेज उछाल देखने को मिला है। इसी वजह से आम उपभोक्ताओं के लिए सोने के गहने खरीदना महंगा सौदा बन गया है। रिपोर्ट के अनुसार, 2025 में भारत में सोने के आभूषणों की मांग में करीब 20 से 25 प्रतिशत तक की गिरावट दर्ज की गई।
विशेष रूप से शादी-ब्याह और त्योहारों के सीजन में भी पहले जैसी खरीदारी नहीं हुई, जो भारतीय बाजार के लिए एक बड़ा संकेत माना जा रहा है।
2026 में कितनी रह सकती है Gold की कुल मांग
विश्लेषकों का अनुमान है कि 2026 में भारत की Gold की कुल मांग 600 से 700 टन के बीच रह सकती है। यह आंकड़ा पिछले वर्ष के मुकाबले कम है और पिछले कुछ वर्षों के औसत से भी नीचे माना जा रहा है।
यह गिरावट मुख्य रूप से ज्वेलरी सेगमेंट में कमजोरी के कारण होगी, हालांकि निवेश मांग इस कमी को कुछ हद तक संतुलित कर सकती है।
निवेश के रूप में Gold की चमक बरकरार
जहां एक ओर आभूषणों की मांग घटी है, वहीं दूसरी ओर Gold में निवेश का आकर्षण बढ़ा है। बार, सिक्के और गोल्ड ETF में निवेश लगातार बढ़ रहा है। अनिश्चित वैश्विक हालात, शेयर बाजार में उतार-चढ़ाव और महंगाई के डर ने निवेशकों को सोने की ओर मोड़ा है।
विशेषज्ञों के अनुसार, 2026 में भी सोना सुरक्षित निवेश विकल्प बना रह सकता है, भले ही उपभोक्ता खरीद कमजोर रहे।
ज्वेलरी उद्योग के सामने नई चुनौती
Gold की मांग में बदलाव से ज्वेलरी उद्योग पर सीधा दबाव पड़ रहा है। छोटे और मध्यम ज्वेलर्स को स्टॉक मैनेजमेंट, डिजाइन रणनीति और कीमत निर्धारण में बदलाव करने की जरूरत पड़ सकती है।
कई कारोबारी अब हल्के वजन के गहनों और कस्टमाइज्ड डिजाइनों पर फोकस कर रहे हैं, ताकि उपभोक्ताओं को आकर्षित किया जा सके।
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आयात और अर्थव्यवस्था पर असर
सोने की मांग में संभावित गिरावट से भारत के गोल्ड इंपोर्ट बिल में कमी आ सकती है, जिससे व्यापार घाटे पर सकारात्मक असर पड़ने की उम्मीद है। यह स्थिति सरकार और नीति निर्माताओं के लिए राहत की खबर मानी जा रही है।
विशेषज्ञों की राय
बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि जब तक Gold की कीमतों में स्थिरता नहीं आती, तब तक ज्वेलरी सेगमेंट में तेजी की उम्मीद कम है। वहीं, निवेश आधारित मांग मजबूत बनी रह सकती है।
निष्कर्ष
2026 में भारत का Gold बाजार संक्रमण के दौर से गुजर सकता है। जहां पारंपरिक आभूषणों की चमक फीकी पड़ती दिख रही है, वहीं निवेश के रूप में सोने की अहमियत बनी हुई है। यह बदलाव न केवल उपभोक्ताओं की सोच को दर्शाता है, बल्कि बाजार की दिशा भी तय करेगा।
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