हुब्बल्ली APMC में सूखी मिर्च की भारी कमी, कीमतें अब तक के उच्चतम स्तर पर

हुब्बल्ली।
कर्नाटक की प्रमुख कृषि मंडियों में शामिल हुब्बल्ली की जगज्ज्योति बसवेश्वर कृषि उपज मंडी समिति (APMC) में इस सीजन सूखी मिर्च की आवक में तेज गिरावट दर्ज की गई है। आवक घटने के साथ-साथ मिर्च की कीमतों में जबरदस्त उछाल देखने को मिल रहा है, जिससे बाजार में असंतुलन की स्थिति बन गई है।

आवक घटी, मंडी में पहले जैसा रौनक नहीं

मंडी प्रशासन और व्यापारियों के अनुसार, इस वर्ष सूखी मिर्च की आवक पिछले साल की तुलना में लगभग आधी रह गई है।
जहां बीते सीजन में मंडी में 69 हजार क्विंटल से अधिक सूखी मिर्च पहुंची थी, वहीं इस बार अब तक कुल आवक करीब 30 हजार क्विंटल के आसपास सिमट गई है।

साप्ताहिक स्तर पर भी गिरावट साफ दिख रही है। पहले जहां हर सप्ताह लगभग 40 हजार बैग मिर्च मंडी में आती थी, अब यह संख्या घटकर 25 हजार बैग के करीब रह गई है।

मौसम बना सबसे बड़ा कारण

कृषि विशेषज्ञों के मुताबिक, इस गिरावट के पीछे सबसे बड़ा कारण पिछले वर्ष हुई असामान्य बारिश है।
अधिक नमी और कीट प्रकोप के चलते कई इलाकों में मिर्च की फसल प्रभावित हुई, जिससे उत्पादन घट गया। इसके अलावा, बीते वर्षों में कम दाम मिलने से कई किसानों ने मिर्च की खेती का रकबा भी कम कर दिया था।

सूखी मिर्च के दाम आसमान पर

आवक कम होने का सीधा असर कीमतों पर पड़ा है।
हुब्बल्ली APMC में इस समय कुछ किस्मों की सूखी मिर्च रिकॉर्ड कीमतों पर बिक रही हैं।

  • डब्बी केम्पू किस्म की अधिकतम कीमत 78 हजार रुपये प्रति क्विंटल तक पहुंच गई है।
  • कड्डी किस्म की मिर्च 59 हजार से 63 हजार रुपये प्रति क्विंटल के दायरे में बिक रही है।

पिछले वर्ष इसी अवधि में अधिकतम कीमत 46 हजार रुपये प्रति क्विंटल के आसपास थी, जिससे मौजूदा बढ़ोतरी की गंभीरता का अंदाजा लगाया जा सकता है।

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किसानों को ऊंचे दाम, लेकिन पूरी राहत नहीं

हालांकि ऊंची कीमतें सुनने में किसानों के लिए फायदेमंद लगती हैं, लेकिन जमीनी हकीकत कुछ अलग है।
कई किसानों का कहना है कि उत्पादन कम होने के कारण कुल बिक्री से होने वाली आय में ज्यादा बढ़ोतरी नहीं हो पा रही है। यानी दाम बढ़े हैं, लेकिन फसल घटने से मुनाफा सीमित रह गया है।

खरीदारों की संख्या बढ़ी, लेकिन कारोबार सीमित

कीमतों में तेजी के चलते मंडी में व्यापारियों और खरीदारों की संख्या जरूर बढ़ी है।
जहां पहले रोजाना 10 से 20 खरीदार सक्रिय रहते थे, अब यह संख्या 80 से 100 तक पहुंच गई है। इसके चलते मंडी में सप्ताह में दो बार विशेष नीलामी सत्र भी आयोजित किए जा रहे हैं।

हालांकि व्यापारियों का अनुमान है कि इस बार सूखी मिर्च का कारोबार मार्च के अंत तक ही सिमट सकता है, जबकि पिछले साल यह गतिविधि जून-जुलाई तक चली थी।

आगे क्या हो सकता है मिर्च बाजार में

कृषि बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि यदि आने वाले महीनों में नई फसल की आवक नहीं बढ़ी, तो कीमतों में और तेजी आ सकती है। वहीं, उद्योग और मसाला कारोबार से जुड़े कुछ खरीदार ऊंचे दामों के कारण खरीदारी टाल रहे हैं, जिससे मांग पर भी असर पड़ सकता है।

विशेषज्ञों की राय और सुझाव

विशेषज्ञों का कहना है कि राज्य और केंद्र सरकार को मिर्च उत्पादक किसानों के लिए मूल्य स्थिरीकरण और बाजार हस्तक्षेप योजनाओं पर गंभीरता से विचार करना चाहिए। इससे एक ओर किसानों को न्यूनतम आय सुरक्षा मिल सकेगी, वहीं दूसरी ओर बाजार में अचानक होने वाले उतार-चढ़ाव को भी नियंत्रित किया जा सकेगा।

निष्कर्ष

हुब्बल्ली APMC में सूखी मिर्च की मौजूदा स्थिति यह साफ संकेत देती है कि मौसम, उत्पादन और बाजार नीति—तीनों का सीधा असर किसानों और उपभोक्ताओं पर पड़ता है। आने वाले हफ्तों में मंडी की चाल इस बात पर निर्भर करेगी कि आवक में सुधार होता है या कीमतें और नई ऊंचाइयों को छूती हैं।

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