कर्नाटक में BJP विधायक Chandru Lamani 5 लाख की रिश्वत लेते गिरफ्तार

लोकायुक्त की ट्रैप कार्रवाई से मचा सियासी भूचाल, माइनर इरिगेशन टेंडर से जुड़ा है मामला

कर्नाटक की राजनीति में उस वक्त हलचल मच गई जब Chandru Lamani को लोकायुक्त पुलिस ने कथित तौर पर 5 लाख रुपये की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों गिरफ्तार कर लिया। वह गडग जिले के शिरहट्टी विधानसभा क्षेत्र से भारतीय जनता पार्टी (BJP) के विधायक हैं। कार्रवाई कर्नाटक लोकायुक्त की विशेष टीम ने ट्रैप ऑपरेशन के तहत की।

क्या है पूरा मामला?

सूत्रों के अनुसार, यह मामला माइनर इरिगेशन (लघु सिंचाई) विभाग के एक निर्माण कार्य से जुड़ा है। शिकायतकर्ता एक सरकारी ठेकेदार है, जिसने आरोप लगाया कि संबंधित कार्य में मंजूरी और भुगतान प्रक्रिया को सुगम बनाने के बदले कुल 11 लाख रुपये की मांग की गई थी।

लोकायुक्त को शिकायत मिलने के बाद प्रारंभिक सत्यापन किया गया और फिर ट्रैप की योजना बनाई गई। तय योजना के मुताबिक जब 5 लाख रुपये की पहली किस्त दी जा रही थी, उसी दौरान टीम ने छापा मारकर विधायक को हिरासत में ले लिया।

ट्रैप कैसे बिछाया गया?

लोकायुक्त पुलिस ने तकनीकी निगरानी और स्वतंत्र गवाहों की मौजूदगी में पूरी कार्रवाई को अंजाम दिया। रकम के सीरियल नंबर पहले से नोट किए गए थे। जैसे ही कथित रूप से राशि स्वीकार की गई, टीम ने मौके पर हस्तक्षेप किया।

इस दौरान विधायक के दो सहयोगियों को भी पूछताछ के लिए हिरासत में लिया गया। पुलिस ने मौके से नकद राशि जब्त कर ली है और इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य भी एकत्र किए जा रहे हैं।

किन धाराओं में मामला दर्ज?

मामला भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 (Prevention of Corruption Act) के तहत दर्ज किया गया है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगा रही हैं कि क्या इस कथित लेनदेन में अन्य अधिकारी या मध्यस्थ भी शामिल थे।

कानूनी प्रक्रिया के तहत आरोपी को विशेष अदालत में पेश किया जाएगा, जहां रिमांड और आगे की जांच पर फैसला होगा।

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राजनीतिक प्रतिक्रिया और सियासी असर

घटना के बाद राज्य की राजनीति में तीखी बयानबाजी शुरू हो गई है। विपक्ष ने इसे “सिस्टम में व्याप्त भ्रष्टाचार का प्रमाण” बताया है और निष्पक्ष जांच की मांग की है।

हालांकि सत्तारूढ़ दल की ओर से आधिकारिक विस्तृत बयान अभी तक सामने नहीं आया है। पार्टी सूत्रों का कहना है कि कानून अपना काम करेगा और जांच के बाद ही कोई अंतिम निर्णय लिया जाएगा।

लोकायुक्त की सक्रियता का संकेत

हाल के वर्षों में कर्नाटक में लोकायुक्त की सक्रियता बढ़ी है। सरकारी अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों के खिलाफ ट्रैप कार्रवाई की संख्या में इजाफा देखा गया है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की कार्रवाई से प्रशासनिक जवाबदेही मजबूत होती है और ठेकेदारी व्यवस्था में पारदर्शिता बढ़ती है।

यह मामला इसलिए भी अहम है क्योंकि इसमें एक निर्वाचित जनप्रतिनिधि पर सीधे आरोप लगे हैं। ऐसे मामलों में न्यायिक प्रक्रिया और सबूतों की विश्वसनीयता अत्यंत महत्वपूर्ण होती है।

आगे क्या?

अब जांच एजेंसियां बैंक लेनदेन, कॉल रिकॉर्ड और अन्य दस्तावेजों की जांच करेंगी। यदि आरोप साबित होते हैं, तो दोषसिद्धि की स्थिति में सजा और अयोग्यता जैसे कानूनी परिणाम सामने आ सकते हैं।

फिलहाल, आरोपी विधायक से पूछताछ जारी है और मामले की अगली सुनवाई विशेष अदालत में होगी।

निष्कर्ष

कर्नाटक में हुई यह गिरफ्तारी सिर्फ एक आपराधिक मामला नहीं, बल्कि राजनीतिक और प्रशासनिक जवाबदेही की कसौटी भी है। जांच और न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही आरोपों की सच्चाई पूरी तरह स्पष्ट होगी।

यह घटनाक्रम एक बार फिर यह सवाल खड़ा करता है कि सार्वजनिक जीवन में पारदर्शिता और नैतिकता को कैसे मजबूत किया जाए, ताकि विकास कार्यों में भ्रष्टाचार की गुंजाइश कम हो सके।

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