Jab Khuli Kitaab रिव्यू: 50 साल पुराने रिश्ते का सच और तलाक की दहलीज पर खड़ा एक बुजुर्ग दंपती

ओटीटी प्लेटफॉर्म ZEE5 पर रिलीज हुई फिल्म “Jab Khuli Kitaab” एक अलग और संवेदनशील विषय को सामने लाती है। आमतौर पर फिल्मों में युवाओं के रिश्ते और तलाक की कहानियां दिखाई जाती हैं, लेकिन यह फिल्म उम्र के उस पड़ाव की कहानी कहती है जहां लोग जीवन के आखिरी चरण में भी रिश्तों की सच्चाई से जूझते नजर आते हैं।

फिल्म में दिग्गज कलाकार Pankaj Kapur और Dimple Kapadia मुख्य भूमिकाओं में हैं। फिल्म का निर्देशन और लेखन Saurabh Shukla ने किया है, जो अपने नाटक पर आधारित इस कहानी को बड़े पर्दे पर लेकर आए हैं।

50 साल की शादी और एक छिपा हुआ सच

Jab Khuli Kitaab फिल्म की कहानी Ranikhet में रहने वाले एक बुजुर्ग दंपती के जीवन पर आधारित है। गोपाल और अनुसूया ने लगभग पचास साल साथ बिताए हैं और बाहर से उनका रिश्ता बेहद मजबूत दिखाई देता है।

लेकिन कहानी में मोड़ तब आता है जब अनुसूया लंबे समय तक कोमा में रहने के बाद होश में आती हैं और अपने पति को एक ऐसा सच बताती हैं जो उनके रिश्ते की नींव हिला देता है। वह स्वीकार करती हैं कि कई दशक पहले उनका एक छोटा-सा विवाहेतर संबंध रहा था।

यह सच सुनने के बाद गोपाल का भरोसा टूट जाता है और वह इतने वर्षों की शादी के बाद तलाक लेने का फैसला कर लेते हैं। यही घटना पूरी फिल्म का केंद्रीय संघर्ष बन जाती है।

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रिश्तों की सच्चाई और भावनात्मक टकराव

Jab Khuli Kitaab फिल्म का सबसे दिलचस्प पहलू यह है कि यह केवल एक राज़ के खुलने की कहानी नहीं है, बल्कि यह सवाल भी उठाती है कि क्या बीते समय की गलतियां वर्तमान रिश्तों को खत्म कर देनी चाहिए।

कहानी इस बात को भी दिखाती है कि उम्र के साथ रिश्तों में ईमानदारी, अपराधबोध और माफी का महत्व कितना बढ़ जाता है। फिल्म में परिवार और समाज की प्रतिक्रिया भी दिखाई गई है, जिससे कहानी और वास्तविक लगती है।

अभिनय बना फिल्म की सबसे बड़ी ताकत

Jab Khuli Kitaab फिल्म की सबसे मजबूत कड़ी इसके कलाकार हैं। पंकज कपूर ने एक ऐसे पति का किरदार निभाया है जो अंदर से टूट चुका है लेकिन अपनी भावनाओं को संयम के साथ व्यक्त करता है। वहीं डिंपल कपाड़िया ने अपने किरदार में अपराधबोध और संवेदनशीलता को बेहद सादगी से दिखाया है।

दोनों कलाकारों की परिपक्व अदाकारी फिल्म को भावनात्मक गहराई देती है।

मजबूत विषय, लेकिन कहानी थोड़ी सीमित

Jab Khuli Kitaab फिल्म का विषय बेहद अनोखा और परिपक्व है, लेकिन कई समीक्षकों का मानना है कि कहानी इस विचार को पूरी गहराई से नहीं तलाश पाती। कुछ हिस्सों में संवाद लंबे लगते हैं और कहानी की गति धीमी हो जाती है।

इसके बावजूद फिल्म एक महत्वपूर्ण सवाल छोड़ जाती है—क्या सच्चाई रिश्तों को मजबूत बनाती है या कभी-कभी वही सच्चाई वर्षों की नींव को हिला सकती है?

क्यों देख सकते हैं यह फिल्म

अगर आप रिश्तों, जीवन के अनुभव और भावनात्मक कहानियों पर आधारित सिनेमा पसंद करते हैं, तो “Jab Khuli Kitaab” एक अलग तरह का अनुभव दे सकती है। यह फिल्म दर्शकों को यह सोचने पर मजबूर करती है कि समय, विश्वास और माफी का रिश्तों में असली महत्व क्या है।

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