भारत सरकार पेट्रोल में एथनॉल की हिस्सेदारी बढ़ाने की दिशा में लगातार काम कर रही है। फिलहाल देश में E20 (20% एथनॉल मिश्रित पेट्रोल) को बढ़ावा दिया जा रहा है, लेकिन भविष्य में E25 या इससे अधिक एथनॉल मिश्रण वाले ईंधन पर भी विचार किया जा सकता है। इसी बीच देश की दो प्रमुख लक्ज़री कार निर्माता कंपनियां Mercedes-Benz India और BMW India ने बड़ा बयान दिया है।
दोनों कंपनियों का कहना है कि उनकी नई पीढ़ी की पेट्रोल कारों को इस तरह विकसित किया गया है कि वे भविष्य में E20 से अधिक एथनॉल मिश्रण वाले ईंधन के साथ भी काम करने की क्षमता रखती हैं। हालांकि कंपनियों ने यह भी स्पष्ट किया कि इस तरह का बदलाव चरणबद्ध तरीके से होना चाहिए ताकि ग्राहकों और पुराने वाहनों पर इसका असर न पड़े।
भविष्य के ईंधन को ध्यान में रखकर तैयार किए गए हैं नए इंजन
ऑटोमोबाइल उद्योग तेजी से बदलते ईंधन मानकों के अनुरूप खुद को ढाल रहा है। Mercedes-Benz और BMW का कहना है कि उनके नवीनतम पेट्रोल इंजन और फ्यूल सिस्टम को भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखकर डिजाइन किया गया है।
इसका मतलब यह नहीं है कि सरकार ने E25 लागू करने का फैसला कर लिया है, बल्कि कंपनियां पहले से ही ऐसी तकनीक पर काम कर रही हैं जिससे भविष्य में किसी नए ईंधन मानक को अपनाने में बड़ी तकनीकी दिक्कत न आए।
कंपनियों ने सरकार को दी महत्वपूर्ण सलाह
Mercedes-Benz India का मानना है कि यदि भारत E20 से आगे बढ़कर E25 या इससे अधिक एथनॉल मिश्रण अपनाता है तो इसे एकदम लागू करने के बजाय चरणबद्ध तरीके से लागू किया जाना चाहिए।
कंपनी का कहना है कि भारत में आज भी बड़ी संख्या में पुराने पेट्रोल वाहन चल रहे हैं, जिन्हें E20 से अधिक एथनॉल मिश्रण के लिए डिजाइन नहीं किया गया है। ऐसे में जल्दबाजी से उपभोक्ताओं को तकनीकी और रखरखाव संबंधी परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है।
इसी वजह से वाहन निर्माता चाहते हैं कि किसी भी नए ईंधन मानक से पहले व्यापक परीक्षण, उद्योग से चर्चा और पर्याप्त तैयारी सुनिश्चित की जाए।
सरकार का क्या है रुख?
केंद्र सरकार फिलहाल E20 पेट्रोल के विस्तार पर ध्यान दे रही है। पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने हाल ही में कहा कि E20 पूरी तरह सुरक्षित है और देश में इसका उपयोग लगातार बढ़ रहा है।
उन्होंने यह भी संकेत दिया कि यदि भविष्य में E25 पर विचार किया जाता है तो उससे पहले वैज्ञानिक परीक्षण, वाहन निर्माताओं से सलाह और सभी संबंधित पक्षों के साथ चर्चा की जाएगी।
वहीं केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने भी कहा है कि एथनॉल मिश्रित पेट्रोल को लेकर फैलाई जा रही कई आशंकाओं का कोई ठोस आधार सामने नहीं आया है।
E20 और E25 में क्या अंतर है?
| ईंधन | एथनॉल की मात्रा | पेट्रोल की मात्रा |
|---|---|---|
| E20 | 20% | 80% |
| E25 | 25% | 75% |
एथनॉल मुख्य रूप से गन्ने, मक्का और अन्य कृषि उत्पादों से तैयार किया जाता है। इससे पेट्रोलियम पर निर्भरता कम करने और पर्यावरण संरक्षण में मदद मिलती है।
सरकार एथनॉल मिश्रण क्यों बढ़ाना चाहती है?
भारत हर साल बड़ी मात्रा में कच्चा तेल आयात करता है। ऐसे में एथनॉल ब्लेंडिंग बढ़ाने के पीछे कई बड़े उद्देश्य हैं।
- विदेशी तेल पर निर्भरता कम करना।
- आयात बिल में कमी लाना।
- किसानों की आय बढ़ाना।
- ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन कम करना।
- ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत बनाना।
सरकार का लक्ष्य आने वाले वर्षों में वैकल्पिक ईंधन के उपयोग को और अधिक बढ़ाना है।
क्या मौजूदा कार मालिकों को चिंता करने की जरूरत है?
फिलहाल नहीं।
यदि आपके पास नई पेट्रोल कार है, विशेष रूप से हाल के वर्षों में लॉन्च हुआ मॉडल, तो उसके E20 अनुकूल होने की संभावना काफी अधिक है। वहीं E25 को लेकर अभी कोई आधिकारिक लागू करने की समय-सीमा तय नहीं की गई है।
यदि भविष्य में E25 लागू होता भी है, तो विशेषज्ञों का मानना है कि सरकार और वाहन निर्माता ग्राहकों को पर्याप्त समय देंगे ताकि किसी प्रकार की असुविधा न हो।
ऑटो इंडस्ट्री के लिए क्या मायने रखता है यह बयान?
Mercedes-Benz और BMW जैसी वैश्विक कंपनियों का यह बयान केवल तकनीकी तैयारी का संकेत नहीं है, बल्कि यह बताता है कि आने वाले वर्षों में ऑटोमोबाइल उद्योग अधिक टिकाऊ और पर्यावरण-अनुकूल ईंधन की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है।
भारत दुनिया के सबसे बड़े ऑटोमोबाइल बाजारों में शामिल है। ऐसे में यहां लागू होने वाले नए ईंधन मानक भविष्य की वाहन तकनीक, इंजन डिजाइन और फ्यूल सिस्टम को भी प्रभावित करेंगे।
विशेषज्ञों की राय
ऑटोमोबाइल विशेषज्ञों का मानना है कि केवल वाहन तैयार होना ही पर्याप्त नहीं है। यदि भविष्य में E25 या उससे अधिक एथनॉल मिश्रण लागू किया जाता है, तो पूरे फ्यूल सप्लाई नेटवर्क, रिफाइनिंग इंफ्रास्ट्रक्चर, सर्विस नेटवर्क और उपभोक्ता जागरूकता पर भी समान रूप से काम करना होगा। यही कारण है कि उद्योग चरणबद्ध बदलाव की मांग कर रहा है।
निष्कर्ष
Mercedes-Benz India और BMW India का यह बयान भारत के ऑटो सेक्टर में आने वाले संभावित बदलावों की ओर इशारा करता है। कंपनियों ने साफ किया है कि उनकी नई पेट्रोल कारें भविष्य के उच्च एथनॉल मिश्रित ईंधन को ध्यान में रखकर विकसित की गई हैं। हालांकि E20 से आगे बढ़ने का फैसला सरकार, ऑटो उद्योग और वैज्ञानिक परीक्षणों के आधार पर ही लिया जाएगा।
फिलहाल वाहन मालिकों के लिए सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि घबराने की आवश्यकता नहीं है। E20 देश में सुरक्षित रूप से इस्तेमाल किया जा रहा है, जबकि E25 पर अभी केवल चर्चा और तकनीकी तैयारी का दौर चल रहा है। आने वाले समय में सरकार की नीति और उद्योग की तैयारी इस बदलाव की दिशा तय करेगी।