आज Deepika Padukone भारतीय सिनेमा की सबसे सफल और प्रभावशाली अभिनेत्रियों में शुमार हैं। उन्होंने बॉलीवुड से लेकर हॉलीवुड तक अपनी अलग पहचान बनाई है। लेकिन बहुत कम लोग जानते हैं कि उनका फिल्मी सफर हिंदी फिल्मों से नहीं, बल्कि कन्नड़ फिल्म इंडस्ट्री से शुरू हुआ था। वर्ष 2006 में रिलीज हुई कन्नड़ फिल्म ‘ऐश्वर्या’ ने न सिर्फ दीपिका को अभिनय की दुनिया में पहला बड़ा अवसर दिया, बल्कि यही फिल्म उनके लिए बॉलीवुड का दरवाजा भी खोल गई।
हाल ही में फिल्म के निर्देशक इंद्रजीत लंकेश ने एक इंटरव्यू में उस दौर से जुड़ी कई दिलचस्प बातें साझा कीं। उन्होंने बताया कि पहली मुलाकात में ही उन्हें विश्वास हो गया था कि दीपिका आने वाले समय में देश की सबसे बड़ी स्टार्स में शामिल होंगी।
पहली नजर में दिख गया था स्टार बनने का आत्मविश्वास
इंद्रजीत लंकेश के मुताबिक, जब उन्होंने Deepika Padukone का ऑडिशन देखा तो उनकी लंबी पर्सनैलिटी, कैमरे के सामने आत्मविश्वास और सहज अभिव्यक्ति ने उन्हें काफी प्रभावित किया। उस समय दीपिका मॉडलिंग की दुनिया में अपनी पहचान बना रही थीं और राष्ट्रीय स्तर पर बैडमिंटन भी खेल चुकी थीं।
निर्देशक का कहना है कि खेल की पृष्ठभूमि ने दीपिका के व्यक्तित्व में अनुशासन, धैर्य और आत्मविश्वास पैदा किया, जो उनके अभिनय में भी साफ दिखाई देता था। यही वजह थी कि उन्हें फिल्म ‘ऐश्वर्या’ की मुख्य भूमिका के लिए चुना गया।
‘ऐश्वर्या’ बनी बॉलीवुड की एंट्री का सबसे बड़ा जरिया
कन्नड़ सुपरस्टार उपेंद्र के साथ रिलीज हुई फिल्म ‘ऐश्वर्या’ को दर्शकों का अच्छा प्रतिसाद मिला। फिल्म में दीपिका की स्क्रीन प्रेजेंस और अभिनय की खूब सराहना हुई। यही प्रदर्शन बाद में मुंबई के फिल्म निर्माताओं की नजर में आया।
बताया जाता है कि फिल्म देखने के बाद फराह खान की टीम ने Deepika Padukone पर गंभीरता से विचार करना शुरू किया। इसके बाद ऑडिशन और स्क्रीन टेस्ट के जरिए उन्हें शाहरुख खान के अपोजिट फिल्म ‘ओम शांति ओम’ के लिए चुना गया।
‘ओम शांति ओम’ से पहले मिली खास ट्रेनिंग
फिल्म इंडस्ट्री में नई होने के बावजूद Deepika Padukone को सीधे एक बड़े सुपरस्टार के साथ लॉन्च किया जा रहा था। इसलिए निर्देशक फराह खान ने उन्हें कई महीनों तक विशेष प्रशिक्षण दिया।
रिपोर्ट्स के अनुसार, शूटिंग शुरू होने के बाद शुरुआती करीब 10 दिनों तक Deepika Padukone को कैमरे के सामने अभिनय करने की अनुमति नहीं दी गई। उन्हें केवल सेट पर रहकर शाहरुख खान के काम करने का तरीका, कैमरे की समझ और प्रोफेशनल व्यवहार सीखने के लिए कहा गया। इस तैयारी का फायदा फिल्म में उनके आत्मविश्वास और शानदार प्रदर्शन के रूप में देखने को मिला।
रातोंरात बन गईं बॉलीवुड की नई सुपरस्टार
साल 2007 में रिलीज हुई ‘ओम शांति ओम’ उस वर्ष की सबसे बड़ी ब्लॉकबस्टर फिल्मों में शामिल रही। फिल्म में Deepika Padukone ने दो अलग-अलग किरदार निभाए, जिन्हें दर्शकों और समीक्षकों दोनों ने खूब पसंद किया।
पहली ही फिल्म के लिए उन्हें फिल्मफेयर बेस्ट फीमेल डेब्यू अवॉर्ड मिला। इसके बाद उन्होंने पीछे मुड़कर नहीं देखा और लगातार कई सफल फिल्मों के जरिए खुद को बॉलीवुड की टॉप अभिनेत्रियों में स्थापित कर लिया।
Deepika Padukone का करियर क्यों है खास?
Deepika Padukone का सफर इस बात का उदाहरण है कि क्षेत्रीय सिनेमा किसी कलाकार के लिए राष्ट्रीय पहचान का मजबूत मंच बन सकता है। उन्होंने अपने करियर में अभिनय के साथ-साथ अलग-अलग तरह के किरदार निभाकर खुद को लगातार चुनौती दी।
उनकी प्रमुख फिल्मों में शामिल हैं—
- ओम शांति ओम
- लव आज कल
- ये जवानी है दीवानी
- चेन्नई एक्सप्रेस
- बाजीराव मस्तानी
- पद्मावत
- पठान
- जवान
- कल्कि 2898 एडी
क्षेत्रीय सिनेमा से बॉलीवुड तक का बढ़ता ट्रेंड
पिछले कुछ वर्षों में कई ऐसे कलाकार सामने आए हैं जिन्होंने क्षेत्रीय फिल्मों से शुरुआत करके हिंदी सिनेमा में बड़ी सफलता हासिल की है। Deepika Padukone इसका सबसे चर्चित उदाहरण हैं। उनकी सफलता यह साबित करती है कि प्रतिभा किसी एक भाषा या फिल्म इंडस्ट्री तक सीमित नहीं होती।
निष्कर्ष
आज Deepika Padukone भारतीय सिनेमा की ग्लोबल पहचान बन चुकी हैं, लेकिन उनकी सफलता की असली नींव कन्नड़ फिल्म ‘ऐश्वर्या’ से रखी गई थी। यदि उन्हें उस फिल्म में पहला मौका नहीं मिलता, तो शायद बॉलीवुड को अपनी सबसे सफल अभिनेत्रियों में से एक इतनी जल्दी नहीं मिलती। यह कहानी नए कलाकारों के लिए भी प्रेरणा है कि मेहनत, सही अवसर और धैर्य किसी भी सपने को हकीकत में बदल सकते हैं।