गोवा में मतदाता सूची को लेकर भारतीय निर्वाचन आयोग ने एक अहम निर्णय लिया है। राज्य में चल रहे स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) की अवधि को पहली बार बढ़ाने की मंजूरी दी गई है। अब गोवा की अंतिम मतदाता सूची 21 फरवरी 2026 को प्रकाशित की जाएगी। पहले यह सूची 14 फरवरी को जारी होने वाली थी।
यह फैसला मतदाता सूची की सटीकता और पारदर्शिता सुनिश्चित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
क्या है SIR और क्यों होता है इतना अहम
स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) एक विशेष प्रक्रिया है, जिसके तहत मतदाता सूची की घर-घर जाकर जांच, सत्यापन और सुधार किया जाता है। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना होता है कि:
- कोई भी पात्र मतदाता सूची से बाहर न रहे
- मृत, स्थानांतरित या डुप्लीकेट नाम हटाए जा सकें
- चुनाव प्रक्रिया पूरी तरह निष्पक्ष बनी रहे
लोकतंत्र में मतदाता सूची को चुनाव की रीढ़ माना जाता है, इसलिए इसकी शुद्धता अत्यंत आवश्यक होती है।
समयसीमा बढ़ाने का कारण क्या है
निर्वाचन आयोग के अनुसार, SIR के दौरान दावे और आपत्तियों से जुड़े मामलों की संख्या अपेक्षा से अधिक रही। कई मामलों में अतिरिक्त सत्यापन की आवश्यकता महसूस की गई, खासकर उन मतदाताओं को लेकर जिन्हें ASD (Absent, Shifted, Dead/Duplicate) श्रेणी में रखा गया है।
अतिरिक्त समय देने से:
- वास्तविक मतदाताओं के नाम गलती से हटने से बचेंगे
- आपत्तियों का निष्पक्ष और पूर्ण निपटारा हो सकेगा
- अंतिम सूची अधिक विश्वसनीय बनेगी
ड्राफ्ट वोटर लिस्ट में क्या सामने आया
ड्राफ्ट मतदाता सूची पहले ही प्रकाशित की जा चुकी है, जिसमें गोवा के कुल मतदाताओं की संख्या लगभग 11 लाख से अधिक बताई गई है। इनमें से एक बड़ा वर्ग सक्रिय मतदाताओं का है, जबकि कुछ नामों को ASD श्रेणी में डालकर जांच के दायरे में रखा गया है।
SIR की अवधि बढ़ने से इन नामों पर दोबारा गौर किया जाएगा, जिससे वास्तविक मतदाताओं को राहत मिल सकती है।
ये भी पढ़े: Kohrra Season 2 Review: अपराध की जांच से आगे समाज की सच्चाई दिखाती दमदार वापसी
राजनीतिक और प्रशासनिक दृष्टि से असर
मतदाता सूची में किसी भी तरह का बदलाव सीधे तौर पर:
- राजनीतिक दलों की रणनीति
- बूथ स्तर की तैयारियों
- चुनावी आंकड़ों
पर असर डालता है। यही वजह है कि SIR प्रक्रिया पर राजनीतिक दलों और नागरिक संगठनों की भी कड़ी नजर रहती है।
विशेषज्ञों का मानना है कि समयसीमा बढ़ाना यह संकेत देता है कि आयोग जल्दबाज़ी के बजाय गुणवत्ता और निष्पक्षता को प्राथमिकता दे रहा है।
मतदाताओं के लिए जरूरी संदेश
निर्वाचन आयोग और राज्य चुनाव कार्यालय ने नागरिकों से अपील की है कि वे:
- अपना नाम और विवरण मतदाता सूची में जरूर जांचें
- किसी भी त्रुटि की स्थिति में समय रहते सुधार के लिए आवेदन करें
- अफवाहों के बजाय आधिकारिक सूचना पर भरोसा करें
यह प्रक्रिया हर मतदाता के लोकतांत्रिक अधिकारों की सुरक्षा से जुड़ी हुई है।
लोकतंत्र के लिए क्यों अहम है यह फैसला
गोवा में SIR की अवधि बढ़ना केवल एक प्रशासनिक निर्णय नहीं है, बल्कि यह लोकतांत्रिक मूल्यों की मजबूती का संकेत है।
सही मतदाता सूची का मतलब है:
- निष्पक्ष चुनाव
- सही प्रतिनिधित्व
- जनता के विश्वास को बनाए रखना
निष्कर्ष: गुणवत्ता को प्राथमिकता देता कदम
गोवा में SIR की समयसीमा बढ़ाने का फैसला यह दिखाता है कि निर्वाचन आयोग मतदाता सूची को लेकर किसी भी तरह का समझौता नहीं करना चाहता।
21 फरवरी को प्रकाशित होने वाली अंतिम सूची राज्य में आने वाले चुनावों के लिए एक मजबूत और भरोसेमंद आधार बनेगी।
ये भी पढ़े: धारवाड़ में बदलेगा खेल का भविष्य: अंतरराष्ट्रीय स्तर का Multi Sports Complex जल्द होगा तैयार