हुब्बल्ली की ‘Flybrary’ बनी बच्चों की नई पसंद

हुब्बल्ली (कर्नाटक): डिजिटल युग में जहां बच्चे मोबाइल और टैबलेट की स्क्रीन पर ज्यादा समय बिता रहे हैं, वहीं कर्नाटक के हुब्बल्ली शहर में एक अनोखी पहल ने इस ट्रेंड को बदलने की शुरुआत कर दी है। यहां की ‘फ्लाइब्रेरी’ (Flybrary) बच्चों और किशोरों के लिए किताबों की नई दुनिया खोल रही है। यह पहल बच्चों को स्क्रीन से दूर रखकर पढ़ने की आदत विकसित करने में मदद कर रही है।

The Times of India में प्रकाशित रिपोर्ट के अनुसार, हुब्बल्ली की यह Flybrary युवा पाठकों के बीच तेजी से लोकप्रिय हो रही है। बच्चे अब मोबाइल गेम्स और सोशल मीडिया की जगह कहानी की किताबें, ज्ञानवर्धक साहित्य और रचनात्मक पुस्तकों को चुन रहे हैं।

क्या है ‘Flybrary’ और क्यों है खास?

‘Flybrary’ एक अनोखा पुस्तकालय मॉडल है, जिसे खास तौर पर बच्चों और युवा पाठकों को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है। यह केवल किताबों का संग्रह नहीं, बल्कि एक ऐसा सुरक्षित और प्रेरणादायक माहौल है, जहां बच्चे:

  • अपनी पसंद की किताबें चुन सकते हैं
  • शांत वातावरण में पढ़ सकते हैं
  • कहानी सत्र और गतिविधियों में भाग ले सकते हैं
  • रचनात्मक सोच और कल्पनाशक्ति को विकसित कर सकते हैं

हुब्बल्ली में यह पहल बच्चों के लिए “गो-टू स्पॉट” बन चुकी है — यानी जब भी खाली समय मिलता है, वे यहां आकर किताबों की दुनिया में खो जाना पसंद करते हैं।

स्क्रीन से किताबों की ओर: बदलती सोच का संकेत

विशेषज्ञों के अनुसार, बढ़ता स्क्रीन टाइम बच्चों के मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य पर असर डाल सकता है। ऐसे में फ्लाइब्रेरी जैसी पहल बच्चों को संतुलित जीवनशैली की ओर प्रेरित करती है।

माता-पिता का कहना है कि:

  • बच्चों का ध्यान अब पढ़ाई और रचनात्मक गतिविधियों में बढ़ा है
  • मोबाइल की लत में कमी आई है
  • भाषा और अभिव्यक्ति कौशल में सुधार दिख रहा है

हुब्बल्ली जैसे शहर में इस तरह की पहल यह साबित करती है कि सही वातावरण मिलने पर बच्चे अब भी किताबों को प्राथमिकता देते हैं।

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हुब्बल्ली में पढ़ने की संस्कृति को मिल रहा बढ़ावा

Hubballi (हुब्बल्ली) कर्नाटक का एक प्रमुख शैक्षणिक और सांस्कृतिक केंद्र है। यहां की Flybrary ने स्थानीय समुदाय को भी जोड़ा है। कई स्वयंसेवी और शिक्षाविद इस पहल में सहयोग दे रहे हैं, जिससे बच्चों के लिए गुणवत्तापूर्ण सामग्री उपलब्ध कराई जा सके।

इस मॉडल की खासियत यह है कि यह केवल पढ़ने तक सीमित नहीं है, बल्कि बच्चों को संवाद, चर्चा और रचनात्मक अभिव्यक्ति के लिए भी मंच देता है।

शिक्षा विशेषज्ञों की राय

शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि अगर इस तरह की पहल अन्य शहरों में भी शुरू की जाए तो:

  • डिजिटल निर्भरता कम हो सकती है
  • बच्चों की एकाग्रता क्षमता बढ़ सकती है
  • रचनात्मकता और आलोचनात्मक सोच को बढ़ावा मिल सकता है

फ्लाइब्रेरी जैसे प्रयास भारत में “रीडिंग कल्चर” को मजबूत करने की दिशा में एक सकारात्मक कदम माने जा रहे हैं।

क्यों जरूरी है ऐसी पहल?

आज के दौर में जब बच्चों का अधिकतर समय स्क्रीन पर बीत रहा है, तब किताबों से जुड़ाव:

  • मानसिक विकास में सहायक
  • शब्दावली और भाषा कौशल में सुधार
  • कल्पनाशक्ति और भावनात्मक संतुलन को मजबूत
  • सामाजिक व्यवहार में सकारात्मक बदलाव

लाता है।

हुब्बल्ली की Flybrary इस बात का उदाहरण है कि यदि बच्चों को सही वातावरण, आकर्षक सामग्री और प्रेरणादायक माहौल मिले तो वे स्वयं किताबों की ओर आकर्षित होते हैं।

निष्कर्ष

डिजिटल युग में जहां स्क्रीन बच्चों के जीवन का बड़ा हिस्सा बन चुकी है, वहीं हुब्बल्ली की Flybrary यह संदेश देती है कि किताबों का महत्व आज भी कम नहीं हुआ है। यह पहल केवल एक पुस्तकालय नहीं, बल्कि नई पीढ़ी को ज्ञान, कल्पना और संस्कारों से जोड़ने का माध्यम बन रही है।

अगर ऐसे प्रयास देशभर में बढ़ते हैं, तो आने वाले समय में पढ़ने की संस्कृति को नया जीवन मिल सकता है।

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