Hubballi | विशेष रिपोर्ट
देश की आज़ादी, आत्मनिर्भरता और स्वदेशी परंपरा का प्रतीक खादी से बने राष्ट्रीय ध्वज को एक बार फिर सम्मान और पहचान दिलाने के लिए कर्नाटक के Hubballi शहर में एक अनूठी नागरिक पहल शुरू हुई है। शहर के विभिन्न क्षेत्रों से जुड़े 200 से अधिक पेशेवरों, युवाओं और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने मिलकर खादी तिरंगे की घटती बिक्री को पुनर्जीवित करने का बीड़ा उठाया है।
यह पहल कर्नाटक खादी ग्रामोद्योग संयुक्त संघ (KKGSS) द्वारा निर्मित बीआईएस-मान्यता प्राप्त खादी राष्ट्रीय ध्वज के समर्थन में चलाई जा रही है।
नीति बदलाव से खादी तिरंगे की मांग क्यों घटी
हाल के वर्षों में केंद्र सरकार द्वारा राष्ट्रीय ध्वज से जुड़े नियमों में संशोधन किया गया, जिसके तहत पॉलिएस्टर और मशीन से बने झंडों को भी वैध अनुमति दे दी गई। इस फैसले का सीधा असर खादी तिरंगे की बिक्री पर पड़ा।
जहाँ पहले सरकारी विभागों, शैक्षणिक संस्थानों और सार्वजनिक कार्यक्रमों में खादी ध्वज की अनिवार्यता थी, वहीं अब सस्ते और बड़े पैमाने पर तैयार होने वाले सिंथेटिक झंडों ने बाजार पर कब्जा कर लिया है।
बिक्री में आई भारी गिरावट, रोजगार पर संकट
संघ से जुड़े अधिकारियों के अनुसार, कुछ वर्षों पहले स्वतंत्रता दिवस और गणतंत्र दिवस के दौरान खादी तिरंगे की बिक्री करोड़ों रुपये तक पहुंच जाती थी, लेकिन अब यह आंकड़ा काफी नीचे गिर चुका है।
इस गिरावट का असर सीधे उन हजारों कारीगरों और महिलाओं पर पड़ा है, जो वर्षों से हाथ से तिरंगा बुनने और सिलने का काम करते आ रहे हैं। खादी तिरंगे का निर्माण पूरी तरह मानव श्रम, अनुशासन और राष्ट्रीय मानकों पर आधारित होता है।
नागरिकों ने बनाया ‘खादी राष्ट्रीय ध्वज प्रमोशन समूह’
स्थिति की गंभीरता को समझते हुए Hubballi के आईटी पेशेवरों, व्यापारियों, छात्रों, शिक्षकों और सामाजिक संगठनों ने मिलकर एक स्वैच्छिक नागरिक समूह का गठन किया है।
इस समूह का उद्देश्य केवल बिक्री बढ़ाना नहीं, बल्कि लोगों को यह समझाना भी है कि:
- खादी तिरंगा भारत की स्वतंत्रता संग्राम की विरासत है
- यह ध्वज आत्मनिर्भर भारत की सोच को दर्शाता है
- खादी का समर्थन स्थानीय रोजगार और पारंपरिक कौशल को बचाता है
तीन स्तरों पर चलाया जा रहा है अभियान
इस पहल को प्रभावी बनाने के लिए समूह ने तीन प्रमुख रणनीतियाँ अपनाई हैं:
1. जन-जागरूकता अभियान
स्कूलों, कॉलेजों, सामाजिक संगठनों और आवासीय क्षेत्रों में खादी तिरंगे के महत्व पर चर्चा और संवाद।
2. डिजिटल और सोशल मीडिया प्रचार
खादी तिरंगे के इतिहास, निर्माण प्रक्रिया और कारीगरों की मेहनत को वीडियो और लेखों के माध्यम से सामने लाया जा रहा है।
3. संस्थागत संपर्क
सरकारी कार्यालयों, निजी कंपनियों और शैक्षणिक संस्थानों से अपील की जा रही है कि वे आधिकारिक कार्यक्रमों में खादी ध्वज का उपयोग करें।
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देश में एकमात्र अधिकृत निर्माता है KKGSS
गौरतलब है कि कर्नाटक खादी ग्रामोद्योग संयुक्त संघ देश की एकमात्र संस्था है, जिसे भारतीय मानक ब्यूरो (BIS) से राष्ट्रीय ध्वज निर्माण की आधिकारिक अनुमति प्राप्त है।
1957 से कार्यरत यह संस्था दशकों से राष्ट्रध्वज निर्माण की जिम्मेदारी निभा रही है और इसकी गुणवत्ता, रंग संयोजन और मानक पूरे देश में मान्य हैं।
विश्लेषण: तिरंगा सिर्फ कपड़ा नहीं, राष्ट्रीय चेतना है
खादी से बना तिरंगा केवल एक ध्वज नहीं, बल्कि:
- स्वतंत्रता संग्राम की स्मृति
- महात्मा गांधी के स्वदेशी विचार
- श्रम और आत्मसम्मान का प्रतीक
यदि खादी तिरंगे को बाजार की प्रतिस्पर्धा में खो दिया गया, तो यह सिर्फ एक उद्योग का नुकसान नहीं होगा, बल्कि राष्ट्रीय सांस्कृतिक विरासत को भी आघात पहुँचेगा।
आगे की राह
Hubballi में शुरू हुई यह पहल आने वाले समय में अन्य शहरों के लिए भी एक मॉडल बन सकती है। नागरिकों, संस्थानों और सरकार के साझा प्रयास से ही खादी तिरंगे को उसका सम्मानजनक स्थान वापस दिलाया जा सकता है।
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