Insurance Company दावा खारिज करना पड़ा महंगा: उपभोक्ता आयोग ने कंपनी पर ठोका जुर्माना, ब्याज और मुआवजा देने का आदेश

हुब्बल्ली/धारवाड़ | विशेष रिपोर्ट

स्वास्थ्य बीमा का दावा बिना ठोस कारण के खारिज करना अब Insurance Company के लिए आसान नहीं रह गया है। कर्नाटक के धारवाड़ जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग ने एक अहम फैसले में बीमा कंपनी को उपभोक्ता का मेडिकल क्लेम चुकाने के साथ-साथ ब्याज और अतिरिक्त मुआवजा देने का आदेश दिया है। यह फैसला बीमा उपभोक्ताओं के अधिकारों को मजबूत करने वाला माना जा रहा है।

क्या है पूरा मामला?

हुब्बल्ली के विद्यानगर निवासी एक इंजीनियर ने स्वास्थ्य बीमा पॉलिसी ले रखी थी। पॉलिसी अवधि के दौरान उन्हें घुटने का ऑपरेशन (नी रिप्लेसमेंट सर्जरी) कराना पड़ा, जिस पर लगभग 3.2 लाख रुपये का खर्च आया। इलाज के बाद उन्होंने अपनी Insurance Company के पास क्लेम दाखिल किया।

हालांकि, Insurance Company ने दावा यह कहते हुए अस्वीकार कर दिया कि यह उपचार पॉलिसी की शर्तों के अंतर्गत कवर नहीं होता। कंपनी ने पूर्व-विद्यमान बीमारी (Pre-existing disease) और अन्य शर्तों का हवाला दिया।

आयोग ने क्या कहा?

धारवाड़ जिला उपभोक्ता आयोग ने दस्तावेजों और पॉलिसी की शर्तों की समीक्षा के बाद पाया कि:

  • बीमा पॉलिसी वैध और प्रभावी थी।
  • इलाज पॉलिसी अवधि के भीतर हुआ था।
  • कंपनी पूर्व-विद्यमान बीमारी का ठोस प्रमाण प्रस्तुत नहीं कर सकी।
  • क्लेम अस्वीकार करने का निर्णय मनमाना और अनुचित था।

आयोग ने इसे “सेवा में कमी” (Deficiency in Service) माना और बीमा कंपनी को निम्न आदेश दिए:

  • लगभग 3.2 लाख रुपये का चिकित्सा खर्च अदा किया जाए।
  • क्लेम की तारीख से 10 प्रतिशत वार्षिक ब्याज दिया जाए।
  • मानसिक पीड़ा और उत्पीड़न के लिए 50,000 रुपये का मुआवजा दिया जाए।
  • मुकदमेबाजी खर्च के रूप में 10,000 रुपये अतिरिक्त दिए जाएं।

क्यों महत्वपूर्ण है यह फैसला?

यह फैसला इसलिए अहम है क्योंकि हाल के वर्षों में स्वास्थ्य बीमा दावों के अस्वीकार होने की शिकायतें बढ़ी हैं। कई मामलों में कंपनियां तकनीकी कारणों या अस्पष्ट शर्तों का हवाला देकर क्लेम रोक देती हैं।

उपभोक्ता आयोग का यह निर्णय स्पष्ट संदेश देता है कि:

  • Insurance Company मनमाने ढंग से दावे खारिज नहीं कर सकतीं।
  • पॉलिसीधारक के हितों की अनदेखी करने पर आर्थिक दंड भुगतना पड़ सकता है।
  • उपभोक्ता अदालतें बीमा विवादों में प्रभावी राहत प्रदान कर रही हैं।

उपभोक्ताओं के लिए क्या सबक?

विशेषज्ञों के अनुसार, स्वास्थ्य बीमा लेते समय निम्न बातों का ध्यान रखना जरूरी है:

  1. पॉलिसी दस्तावेज और शर्तें ध्यान से पढ़ें।
  2. पूर्व-विद्यमान बीमारी की जानकारी सही-सही दें।
  3. अस्पताल के सभी बिल, रिपोर्ट और डिस्चार्ज समरी सुरक्षित रखें।
  4. क्लेम अस्वीकार होने पर लिखित कारण मांगें।
  5. जरूरत पड़ने पर जिला उपभोक्ता आयोग में शिकायत दर्ज कराएं।

उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम के तहत बीमा कंपनियां सेवा प्रदाता मानी जाती हैं और उनके खिलाफ शिकायत दर्ज कराई जा सकती है।

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बढ़ती बीमा जागरूकता का संकेत

स्वास्थ्य खर्च में लगातार बढ़ोतरी के बीच Insurance Company की मांग बढ़ी है। लेकिन इसके साथ ही क्लेम से जुड़े विवाद भी सामने आ रहे हैं। ऐसे में उपभोक्ता आयोग के सख्त फैसले बीमा क्षेत्र में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम हैं।

निष्कर्ष

धारवाड़ उपभोक्ता आयोग का यह फैसला स्वास्थ्य बीमा धारकों के लिए राहत भरा है। यह स्पष्ट करता है कि यदि Insurance Company बिना पर्याप्त आधार के दावा खारिज करती है, तो उसे न केवल मूल राशि बल्कि ब्याज और अतिरिक्त मुआवजा भी देना पड़ सकता है।

यह निर्णय उपभोक्ताओं को अपने अधिकारों के प्रति जागरूक रहने और जरूरत पड़ने पर कानूनी विकल्प अपनाने का भरोसा देता है।

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