सरकारी स्कूलों में फिर लौटी ‘Water Bell’, बच्चों के स्वास्थ्य को लेकर शिक्षा विभाग की अहम पहल

हब्बल्ली/धरवाड़:
गर्मी के मौसम में बच्चों के स्वास्थ्य को प्राथमिकता देते हुए कर्नाटक के सरकारी स्कूलों में ‘Water Bell’ प्रणाली को दोबारा शुरू किया गया है। इस पहल का उद्देश्य विद्यार्थियों को नियमित अंतराल पर पानी पीने की याद दिलाना और उन्हें डिहाइड्रेशन जैसी समस्याओं से बचाना है। शिक्षा विभाग ने इसे बच्चों की शारीरिक और मानसिक सेहत के लिए एक जरूरी कदम बताया है।

क्या है Water Bell सिस्टम और कैसे करता है काम

Water Bell सिस्टम के तहत स्कूलों में सामान्य पीरियड बेल के अलावा दिन में चार बार अलग से घंटी बजाई जाती है। इस घंटी के बजते ही शिक्षक बच्चों को पानी पीने के लिए प्रेरित करते हैं।

Water Bell के निर्धारित समय

  • सुबह 10:30 बजे
  • दोपहर 12:00 बजे
  • दोपहर 2:00 बजे
  • शाम 4:00 बजे

इस व्यवस्था से बच्चों को यह समझाने में मदद मिलती है कि पानी पीना भी पढ़ाई जितना ही जरूरी है।

कितने स्कूलों में लागू हुई यह व्यवस्था

जानकारी के अनुसार धरवाड़ जिले के 850 से अधिक सरकारी स्कूलों में इस प्रणाली को लागू किया गया है। इसमें प्राथमिक, उच्च प्राथमिक और माध्यमिक विद्यालय शामिल हैं। शिक्षा विभाग का लक्ष्य है कि आने वाले समय में यह व्यवस्था सभी सरकारी और सहायता प्राप्त स्कूलों में प्रभावी रूप से लागू हो।

गर्मी में बच्चों के लिए क्यों जरूरी है यह कदम

स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, स्कूल जाने वाले बच्चे अक्सर खेलकूद और पढ़ाई में व्यस्त रहते हैं और पानी पीना भूल जाते हैं। इसका असर उनकी एकाग्रता, ऊर्जा स्तर और संपूर्ण स्वास्थ्य पर पड़ता है।

  • पानी की कमी से थकान और चक्कर की समस्या हो सकती है
  • पढ़ाई पर ध्यान केंद्रित करने में दिक्कत आती है
  • गर्मी में हीट स्ट्रोक का खतरा बढ़ जाता है

Water Bell सिस्टम इन सभी जोखिमों को कम करने में मदद करता है।

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सामाजिक संगठनों का भी मिल रहा सहयोग

इस पहल को सफल बनाने में सामाजिक संगठनों की भी भूमिका रही है। कुछ स्वयंसेवी संस्थाओं ने स्कूलों में बच्चों को पानी की बोतलें उपलब्ध करवाई हैं, ताकि वे रोज़ अपने साथ साफ पानी ला सकें। इससे बच्चों में स्वच्छता और स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता भी बढ़ रही है।

शिक्षकों का अनुभव: पढ़ाई में बढ़ी एकाग्रता

शिक्षकों का कहना है कि Water Bell शुरू होने के बाद बच्चों में थकान कम देखने को मिल रही है और वे कक्षा में ज्यादा सक्रिय रहते हैं। कई स्कूलों में यह भी देखा गया है कि नियमित पानी पीने से बच्चों का व्यवहार और ध्यान क्षमता बेहतर हुई है।

पहले भी लागू हो चुकी है यह योजना

Water Bell प्रणाली पहले भी कुछ वर्षों पहले शुरू की गई थी, लेकिन उस समय इसे व्यापक स्तर पर लागू नहीं किया जा सका। इस बार शिक्षा विभाग ने स्पष्ट दिशा-निर्देश, शिक्षकों की जिम्मेदारी और निगरानी व्यवस्था के साथ इसे फिर से लागू किया है, ताकि यह पहल लंबे समय तक प्रभावी बनी रहे।

विशेषज्ञों की राय: छोटी पहल, बड़ा असर

शिक्षा और स्वास्थ्य विशेषज्ञ मानते हैं कि Water Bell जैसी पहल बच्चों में जीवन भर की अच्छी आदतें विकसित करने में मदद करती है। नियमित पानी पीने की आदत न सिर्फ स्कूल जीवन में, बल्कि भविष्य में भी उनके स्वास्थ्य के लिए लाभकारी साबित हो सकती है।

निष्कर्ष

सरकारी स्कूलों में वॉटर बेल की पुनः शुरुआत बच्चों के स्वास्थ्य को लेकर एक सराहनीय और व्यावहारिक कदम है। यह पहल दिखाती है कि शिक्षा के साथ-साथ छात्रों की सेहत को भी बराबर महत्व दिया जा रहा है। अगर इसे निरंतर और प्रभावी ढंग से लागू किया गया, तो इसके सकारात्मक परिणाम लंबे समय तक देखने को मिल सकते हैं।

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