HDMC का बड़ा फैसला: शहर के 12 पार्कों की जिम्मेदारी अब महिला स्वयं सहायता समूहों के हाथ

हब्बल्ली-धारवाड़ में स्वच्छता, हरियाली और महिला सशक्तिकरण को एक साथ बढ़ावा देने की पहल

हब्बल्ली-धारवाड़ (कर्नाटक) — शहर के सार्वजनिक पार्कों के रख-रखाव को बेहतर बनाने और महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त करने की दिशा में हब्बल्ली-धारवाड़ नगर निगम (HDMC) ने एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। नगर निगम ने शहर के 12 प्रमुख पार्कों का रख-रखाव महिला स्वयं सहायता समूहों (SHGs) को सौंपने का निर्णय लिया है।

यह पहल केंद्र सरकार की AMRUT 2.0 योजना के अंतर्गत चल रहे ‘अमृत मित्र’ कार्यक्रम के तहत लागू की गई है।

पार्कों के रख-रखाव से जुड़ी पूरी जिम्मेदारी SHG के पास

HDMC अधिकारियों के अनुसार, चयनित महिला स्वयं सहायता समूह अब इन पार्कों की:

  • नियमित सफाई
  • पौधों और हरित क्षेत्रों की देखभाल
  • बुनियादी रख-रखाव
  • नागरिकों में स्वच्छता और अनुशासन के प्रति जागरूकता

जैसे कार्यों की जिम्मेदारी निभाएंगे। नगर निगम का मानना है कि स्थानीय स्तर पर काम करने वाले समूह पार्कों की स्थिति को ज्यादा बेहतर ढंग से संभाल सकते हैं।

प्रत्येक पार्क के लिए 10 लाख रुपये का वार्षिक बजट

इस योजना के तहत हर पार्क के रख-रखाव के लिए करीब 10 लाख रुपये प्रति वर्ष की राशि निर्धारित की गई है। यह फंड सीधे संबंधित महिला स्वयं सहायता समूह को दिया जाएगा, जिससे वे:

  • अपने सदस्यों को नियमित रोजगार दे सकें
  • पार्क प्रबंधन में आवश्यक संसाधनों का उपयोग कर सकें
  • आत्मनिर्भर बन सकें

यह कदम महिला SHG के लिए स्थायी आय का स्रोत बनने की दिशा में भी अहम माना जा रहा है।

किन पार्कों को किया गया है शामिल

HDMC द्वारा जिन पार्कों को इस योजना के पहले चरण में शामिल किया गया है, उनमें शहर के प्रमुख और व्यस्त पार्क शामिल हैं। इनमें से कुछ प्रमुख नाम इस प्रकार हैं:

  • चितागुप्पी पार्क
  • एमजी पार्क
  • अंकल पार्क
  • साधानेकेरी पार्क
  • केसी पार्क

नगर निगम का कहना है कि शुरुआती चरण के सफल रहने पर इस मॉडल को अन्य पार्कों तक भी विस्तारित किया जाएगा।

क्यों खास है यह मॉडल

नगर प्रशासन के अनुसार, यह केवल आउटसोर्सिंग नहीं बल्कि समुदाय आधारित सहभागिता मॉडल है। इसके मुख्य फायदे हैं:

  • स्थानीय महिलाएं सीधे शहर के विकास से जुड़ेंगी
  • पार्कों की देखभाल में लापरवाही की संभावना कम होगी
  • नगर निगम पर वित्तीय और प्रशासनिक दबाव घटेगा
  • नागरिकों में सार्वजनिक संपत्ति के प्रति जिम्मेदारी की भावना बढ़ेगी

विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की योजनाएं शहरी प्रशासन में लंबे समय तक टिकाऊ समाधान प्रदान कर सकती हैं।

महिला सशक्तिकरण की दिशा में मजबूत कदम

सामाजिक कार्यकर्ताओं का कहना है कि पार्क रख-रखाव जैसे कार्य महिला स्वयं सहायता समूहों के लिए उपयुक्त हैं, क्योंकि:

  • इसमें स्थानीय ज्ञान और नियमित निगरानी की जरूरत होती है
  • महिलाओं को अपने ही क्षेत्र में काम करने का अवसर मिलता है
  • सामुदायिक सम्मान और पहचान बढ़ती है

यह पहल न केवल रोजगार उपलब्ध कराती है, बल्कि महिलाओं की निर्णय-निर्माण प्रक्रिया में भागीदारी भी मजबूत करती है।

आगे क्या है HDMC की योजना

HDMC अधिकारियों ने संकेत दिया है कि भविष्य में:

  • पार्कों के प्रदर्शन का नियमित मूल्यांकन किया जाएगा
  • सफाई और हरियाली से जुड़े मानकों को तय किया जाएगा
  • अच्छा प्रदर्शन करने वाले SHG को अन्य सार्वजनिक स्थलों की जिम्मेदारी भी दी जा सकती है

नगर निगम इस मॉडल को शहर के अन्य हिस्सों में लागू करने की संभावना भी तलाश रहा है।

निष्कर्ष

HDMC की यह पहल शहरी विकास, स्वच्छता और महिला सशक्तिकरण को एक साथ जोड़ती है। यदि यह मॉडल अपेक्षित परिणाम देता है, तो यह अन्य नगर निकायों के लिए भी एक उदाहरण बन सकता है।

शहर के पार्क अब केवल मनोरंजन की जगह नहीं रहेंगे, बल्कि सामुदायिक सहभागिता और आत्मनिर्भरता का प्रतीक बन सकते हैं।

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