खुद को गंभीरता से न लेने वाली फिल्म, लेकिन हर जगह नहीं बैठती कॉमेडी
बॉलीवुड में स्पाई फिल्मों का ट्रेंड लगातार मजबूत होता जा रहा है, लेकिन इसी भीड़ में कॉमेडी का तड़का लगाना आसान काम नहीं है। ‘Happy Patel Khatarnaak Jasoos’ इसी चुनौती को स्वीकार करती है। अभिनेता, स्टैंड-अप कॉमेडियन और लेखक वीर दास इस फिल्म में मुख्य भूमिका में हैं और कहानी भी उनके ही अंदाज़ की है—थोड़ी अजीब, थोड़ी बेतुकी और पूरी तरह आत्म-व्यंग्य से भरी हुई।
NDTV की समीक्षा के मुताबिक, यह फिल्म एक ऐसी स्पाई-कॉमेडी है जो खुद को गंभीरता से नहीं लेती और इसी वजह से कई जगह मनोरंजक लगती है, लेकिन पूरी तरह प्रभाव छोड़ने में सफल नहीं हो पाती।
Happy Patel Khatarnaak Jasoos कहानी: जासूसी कम, आत्म-व्यंग्य ज्यादा
फिल्म की कहानी हैप्पी पटेल नाम के एक ऐसे किरदार के इर्द-गिर्द घूमती है, जो जासूस तो है, लेकिन पारंपरिक बॉलीवुड स्पाई हीरो से बिल्कुल अलग। उसके मिशन, उसकी ट्रेनिंग और उसकी सोच—सब कुछ अव्यवस्थित और हास्यपूर्ण है।
कहानी जानबूझकर जटिल नहीं बनाई गई है। फिल्म का फोकस थ्रिल पैदा करने से ज्यादा दर्शकों को यह एहसास दिलाने पर है कि यह एक सिल्ली, सेल्फ-अवेयर स्पाई फिल्म है, जो खुद अपने जॉनर का मज़ाक उड़ाती है। हालांकि, यही प्रयोग कई बार फिल्म की कमजोरी भी बन जाता है।
अभिनय: वीर दास का अंदाज़ फिल्म की जान
वीर दास इस फिल्म की सबसे बड़ी ताकत हैं। उनका संवाद बोलने का तरीका, बॉडी लैंग्वेज और टाइमिंग कई दृश्यों में असर छोड़ती है। वह ऐसे जासूस की भूमिका निभाते हैं, जो खुद अपनी काबिलियत पर भी शक करता है।
सहायक कलाकारों का काम ठीक-ठाक है, लेकिन उन्हें ज्यादा गहराई नहीं मिलती। फिल्म का पूरा बोझ वीर दास के कंधों पर है, जिसे वह काफी हद तक संभाल लेते हैं।
निर्देशन और लेखन: प्रयोग सराहनीय, लेकिन संतुलन कमजोर
Happy Patel Khatarnaak Jasoos फिल्म का लेखन और निर्देशन जानबूझकर अराजक रखा गया है। कई दृश्य ऐसे हैं, जो एक स्केच या स्टैंड-अप बिट जैसे लगते हैं। कुछ जगह यह शैली ताज़ा महसूस होती है, तो कुछ जगह फिल्म बिखरती हुई नजर आती है।
कॉमेडी हर दर्शक के लिए काम करे, ऐसा जरूरी नहीं। जो दर्शक स्मार्ट, मेटा और आत्म-व्यंग्य वाली कॉमेडी पसंद करते हैं, उन्हें फिल्म के कुछ हिस्से बेहद पसंद आ सकते हैं।
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तकनीकी पक्ष: साधारण लेकिन कामचलाऊ
सिनेमैटोग्राफी और एडिटिंग औसत स्तर की है। फिल्म का बैकग्राउंड स्कोर हल्का-फुल्का है, जो इसके टोन से मेल खाता है। हालांकि, तकनीकी स्तर पर फिल्म कुछ नया पेश नहीं करती।
Happy Patel Khatarnaak Jasoos फिल्म की सबसे बड़ी समस्या क्या है?
फिल्म की सबसे बड़ी कमजोरी इसकी असमान गति और अधूरी कॉमिक पंचलाइन हैं। कई जोक्स सेट-अप तो अच्छे हैं, लेकिन उनका पे-ऑफ कमजोर रह जाता है। यही कारण है कि फिल्म का असर लगातार बना नहीं रह पाता।
क्या ‘Happy Patel Khatarnaak Jasoos’ देखनी चाहिए?
अगर आप वीर दास के स्टैंड-अप और उनकी लेखन शैली के प्रशंसक हैं, तो यह फिल्म आपको पसंद आ सकती है। यह एक ऐसी स्पाई-कॉमेडी है, जिसे दिमाग पर जोर डाले बिना देखा जा सकता है।
लेकिन अगर आप दमदार थ्रिल, कसी हुई कहानी और ज़ोरदार हास्य की उम्मीद कर रहे हैं, तो यह फिल्म आपकी अपेक्षाओं पर पूरी तरह खरी नहीं उतरेगी।
निष्कर्ष
‘Happy Patel Khatarnaak Jasoos’ एक ईमानदार लेकिन असमान प्रयास है। फिल्म में हंसी के पल हैं, प्रयोग की हिम्मत है, लेकिन मजबूत पटकथा की कमी साफ दिखाई देती है। यह फिल्म हर किसी के लिए नहीं है, लेकिन सही दर्शक वर्ग को यह हल्का-फुल्का मनोरंजन दे सकती है।
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