गुजरात के Banaskantha जिले से सामने आया रेबीज का एक मामला पूरे इलाके के लिए चेतावनी बन गया है। एक युवक में इस जानलेवा बीमारी के गंभीर लक्षण दिखाई दिए, जिसके बाद उसके असामान्य और हिंसक व्यवहार से गांव से लेकर अस्पताल तक हड़कंप मच गया।
तीन महीने पहले कुत्ते ने काटा, इलाज में लापरवाही पड़ी भारी
जानकारी के अनुसार, प्रभावित युवक को करीब तीन महीने पहले एक कुत्ते ने काटा था, लेकिन उसने समय रहते एंटी-रेबीज वैक्सीन और आवश्यक इंजेक्शन नहीं लगवाए। यही लापरवाही धीरे-धीरे उसकी जान पर भारी पड़ गई।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों के मुताबिक, रेबीज वायरस शरीर में प्रवेश करने के बाद धीरे-धीरे मस्तिष्क और तंत्रिका तंत्र को नुकसान पहुंचाता है, और लक्षण दिखने लगें तो स्थिति बेहद गंभीर हो जाती है।
कुत्ते जैसी आवाजें, चार पैरों पर चलने की कोशिश
बीते कुछ दिनों में युवक के व्यवहार में अचानक बदलाव देखा गया। स्थानीय लोगों ने बताया कि वह:
- कुत्तों जैसी आवाजें निकालने लगा
- चार पैरों पर रेंगने और दौड़ने की कोशिश करने लगा
- अत्यधिक आक्रामक हो गया
- आसपास मौजूद लोगों पर हमला करने का प्रयास किया
स्थिति बिगड़ने पर गांव वालों ने पुलिस की मदद से उसे पालनपुर सिविल अस्पताल में भर्ती कराया।
अस्पताल में भी बेकाबू, विशेष निगरानी में रखा गया मरीज
अस्पताल पहुंचने के बाद भी युवक को नियंत्रित करना आसान नहीं था। डॉक्टरों के अनुसार, मरीज ने:
- बिस्तर की लोहे की रेलिंग को काटने की कोशिश की
- तेज आवाजें निकालते हुए हिंसक व्यवहार किया
हालात को देखते हुए प्रशासन को पुलिस और अन्य विभागों की मदद लेनी पड़ी। फिलहाल मरीज को अलग वार्ड में सैडेटिव देकर विशेष निगरानी में रखा गया है।
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डॉक्टरों की चेतावनी: लक्षण दिखने के बाद बचना मुश्किल
चिकित्सकों का कहना है कि रेबीज एक 100% घातक बीमारी है, यदि इसके लक्षण प्रकट हो जाएं। यह वायरस सीधे मस्तिष्क पर असर डालता है और इलाज की संभावना बेहद सीमित रह जाती है।
डॉक्टरों ने साफ कहा कि समय पर वैक्सीनेशन से ही इस बीमारी को रोका जा सकता है।
रेबीज क्या है और कैसे फैलता है
रेबीज एक वायरल बीमारी है जो मुख्य रूप से:
- कुत्तों
- बिल्लियों
- बंदरों
- अन्य संक्रमित जानवरों
के काटने या खरोंच से फैलती है। यह बीमारी इंसानों और जानवरों दोनों के लिए घातक है।
जान बचाने के लिए क्या करें: विशेषज्ञों की सलाह
स्वास्थ्य विशेषज्ञों की सलाह है कि:
- किसी भी जानवर के काटने पर घाव को तुरंत साबुन और पानी से धोएं
- बिना देरी किए नजदीकी अस्पताल में एंटी-रेबीज वैक्सीन लगवाएं
- छोटे घाव को भी हल्के में न लें
- पूरे वैक्सीनेशन कोर्स को पूरा करें
यह घटना क्यों है गंभीर चेतावनी
यह मामला केवल एक व्यक्ति की कहानी नहीं है, बल्कि यह समय पर इलाज और जागरूकता की अहमियत को दर्शाता है। थोड़ी-सी लापरवाही जानलेवा साबित हो सकती है।
निष्कर्ष
Banaskantha की यह घटना बताती है कि रेबीज जैसी बीमारी आज भी उतनी ही खतरनाक है, जितनी पहले थी। समय पर टीकाकरण और सही जानकारी ही इससे बचाव का एकमात्र रास्ता है।
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