सोशल मीडिया पर इन दिनों एक नन्हे बंदर का वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है। जापान के Ichikawa City Zoo में जन्मे इस शिशु बंदर ‘Punch’ की कहानी संघर्ष, अकेलेपन और अंततः स्वीकार किए जाने की भावुक यात्रा को दिखाती है।
हाल ही में सामने आए वीडियो में पंच को अपने समूह के एक वयस्क बंदर से गले मिलते देखा गया। यह दृश्य इसलिए खास है क्योंकि कुछ महीनों पहले तक यही समूह उसे अपनाने से हिचक रहा था।
जन्म के बाद मिला अस्वीकार, देखभाल कर्मचारियों ने संभाली जिम्मेदारी
रिपोर्ट्स के अनुसार, Punch का जन्म जुलाई 2025 में हुआ था। जन्म के तुरंत बाद उसकी मां ने उसे स्वीकार नहीं किया, जिसके कारण चिड़ियाघर के कर्मचारियों को उसकी विशेष देखभाल करनी पड़ी।
वन्यजीव विशेषज्ञों के मुताबिक, बंदरों के सामाजिक ढांचे में मां और समूह की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण होती है। शुरुआती अस्वीकार भावनात्मक और सामाजिक विकास को प्रभावित कर सकता है। ऐसे मामलों में पशु चिकित्सकों और देखभाल करने वालों की भूमिका अहम हो जाती है।
समूह में शामिल होने की चुनौती
जब Punch को अन्य बंदरों के साथ रखा गया, तो शुरुआत में उसे सहज स्वीकार्यता नहीं मिली। बंदरों के सामाजिक व्यवहार में पदानुक्रम और समूह संतुलन महत्वपूर्ण होता है। किसी नए या कमजोर सदस्य को अपनाने में समय लग सकता है।
हालांकि, चिड़ियाघर प्रशासन ने स्पष्ट किया कि उसके साथ गंभीर आक्रामकता नहीं हुई, बल्कि यह सामाजिक समायोजन की सामान्य प्रक्रिया थी।
दिल छू लेने वाला पल: गले लगाकर मिला अपनापन
फरवरी 2026 में सामने आए वीडियो में एक वयस्क बंदर को Punch को गले लगाते और उसके साथ समय बिताते देखा गया। यह दृश्य संकेत देता है कि अब पंच धीरे-धीरे समूह का हिस्सा बन रहा है।
बंदरों में “ग्रूमिंग” यानी एक-दूसरे की सफाई करना और शारीरिक संपर्क बनाना सामाजिक विश्वास और स्वीकृति का संकेत माना जाता है। विशेषज्ञों का कहना है कि यह व्यवहार दर्शाता है कि पंच अब अपने समूह में सुरक्षित और स्वीकार्य महसूस कर रहा है।
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सोशल मीडिया पर भावुक प्रतिक्रिया
वीडियो सामने आने के बाद हजारों यूजर्स ने इसे साझा किया। लोगों ने इसे उम्मीद और सकारात्मक बदलाव का प्रतीक बताया। कई यूजर्स ने लिखा कि यह कहानी हमें याद दिलाती है कि समय और धैर्य के साथ स्वीकार्यता संभव है।
इस घटना ने पशु व्यवहार और संरक्षण के प्रति भी जागरूकता बढ़ाई है।
विशेषज्ञों की राय: सामाजिक प्राणी हैं बंदर
वन्यजीव व्यवहार विशेषज्ञों के अनुसार, बंदर अत्यंत सामाजिक प्राणी होते हैं। समूह में उनकी पहचान, सुरक्षा और मानसिक संतुलन जुड़ा होता है। यदि कोई शिशु प्रारंभ में अलग-थलग रह जाए, तो उसके सामाजिक कौशल विकसित होने में समय लग सकता है।
ऐसे मामलों में नियंत्रित वातावरण, सतत निगरानी और क्रमिक परिचय (Gradual Introduction) की प्रक्रिया अपनाई जाती है, जिससे संघर्ष कम हो और स्वीकार्यता बढ़े।
क्या सीख देती है Punch की कहानी?
Punch की कहानी सिर्फ एक वायरल वीडियो नहीं है, बल्कि यह धैर्य, सामंजस्य और सामाजिक स्वीकृति की प्रक्रिया को समझने का अवसर भी है।
यह घटना बताती है कि पशु जगत में भी भावनात्मक जुड़ाव और समूह समर्थन कितना महत्वपूर्ण होता है। सही देखभाल और समय मिलने पर अस्वीकार भी स्वीकार में बदल सकता है।
निष्कर्ष
इचिकावा सिटी जू का यह वीडियो दर्शाता है कि प्रकृति में संबंधों का निर्माण एक प्रक्रिया है। Punch का अपने समूह में स्वीकार किया जाना न केवल एक सकारात्मक विकास है, बल्कि यह मानवीय संवेदनाओं को भी झकझोरता है।
इस तरह की घटनाएं हमें पशुओं के व्यवहार को समझने और उनके प्रति अधिक संवेदनशील बनने की प्रेरणा देती हैं।
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