बेंगलुरु स्थित होम-इंटीरियर स्टार्टअप Livspace ने बड़े संगठनात्मक बदलाव के तहत करीब 1,000 कर्मचारियों की छंटनी की घोषणा की है। यह संख्या कंपनी के कुल कार्यबल का लगभग 12 प्रतिशत बताई जा रही है। इसी घटनाक्रम के बीच कंपनी के सह-संस्थापक Saurabh Jain ने भी पद छोड़ दिया है।
कंपनी ने स्पष्ट किया है कि यह कदम लागत कटौती से अधिक “AI-नेटिव” संगठन बनने की रणनीति का हिस्सा है।
AI-ड्रिवन बदलाव: कंपनी का नया विजन
Livspace प्रबंधन के अनुसार कंपनी अब पारंपरिक मॉडल से हटकर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित संचालन प्रणाली अपनाने जा रही है। इसके तहत कई प्रक्रियाओं को ऑटोमेट किया जाएगा, जिनमें डिज़ाइन, कस्टमर इंटरैक्शन, लीड मैनेजमेंट और प्रोजेक्ट मॉनिटरिंग शामिल हैं।
कंपनी का कहना है कि AI टूल्स के जरिए कार्यकुशलता बढ़ेगी, प्रोजेक्ट डिलीवरी समय घटेगा और ग्राहक अनुभव अधिक सटीक व व्यक्तिगत बनाया जा सकेगा।
किन विभागों पर पड़ा असर?
सूत्रों के मुताबिक, छंटनी का असर कई प्रमुख विभागों पर पड़ा है, जिनमें शामिल हैं:
- डिजाइन टीम
- सेल्स और लीड मैनेजमेंट
- ऑपरेशंस
- मार्केटिंग
कंपनी अब 3D डिजाइनिंग, ऑटोमेटेड कोटेशन सिस्टम और AI-संचालित कस्टमर सपोर्ट एजेंट्स को प्राथमिकता दे रही है।
सौरभ जैन का इस्तीफा: नेतृत्व में बदलाव
Livspace के सह-संस्थापक सौरभ जैन पिछले एक दशक से अधिक समय से कंपनी से जुड़े थे। उन्होंने कंपनी के विस्तार और रणनीतिक साझेदारियों में अहम भूमिका निभाई थी।
कंपनी की ओर से जारी बयान में कहा गया कि उनका इस्तीफा व्यक्तिगत कारणों से है और संगठन उनके योगदान की सराहना करता है। हालांकि, उद्योग विश्लेषकों का मानना है कि बड़े स्तर के पुनर्गठन के दौरान शीर्ष नेतृत्व में बदलाव असामान्य नहीं है।
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वित्तीय प्रदर्शन: घाटे में कमी, राजस्व में वृद्धि
हाल के वित्तीय आंकड़ों के अनुसार कंपनी ने पिछले वित्तीय वर्ष में राजस्व वृद्धि दर्ज की है और घाटे में कमी लाई है।
- अनुमानित वार्षिक राजस्व: लगभग ₹1,400 करोड़ से अधिक
- घाटे में उल्लेखनीय कमी
यह संकेत देता है कि कंपनी लाभप्रदता की दिशा में आगे बढ़ना चाहती है और AI निवेश को दीर्घकालिक रणनीति के रूप में देख रही है।
भारतीय स्टार्टअप इकोसिस्टम में AI की लहर
Livspace का यह कदम ऐसे समय में आया है जब भारत का स्टार्टअप सेक्टर तेजी से AI-आधारित समाधानों की ओर बढ़ रहा है। कई कंपनियां मानव-आधारित प्रक्रियाओं को डिजिटल और स्वचालित प्रणालियों से बदल रही हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले वर्षों में:
- डेटा एनालिटिक्स
- मशीन लर्निंग
- ऑटोमेशन इंजीनियरिंग
- AI-सक्षम डिजाइन
जैसी स्किल्स की मांग तेजी से बढ़ेगी।
कर्मचारियों के लिए क्या संकेत?
AI आधारित परिवर्तन से पारंपरिक भूमिकाओं में काम करने वाले कर्मचारियों के लिए चुनौतियां बढ़ सकती हैं। करियर विशेषज्ञों की सलाह है कि प्रभावित कर्मचारी:
- AI और डिजिटल टूल्स में प्रशिक्षण लें
- अपस्किलिंग और रिस्किलिंग कार्यक्रमों में भाग लें
- टेक-ड्रिवन इंडस्ट्री में अवसर तलाशें
तकनीकी बदलाव के इस दौर में अनुकूलन क्षमता ही भविष्य की सफलता की कुंजी मानी जा रही है।
उद्योग विशेषज्ञ क्या कहते हैं?
मार्केट एनालिस्ट्स के अनुसार, Livspace का कदम एक व्यापक वैश्विक प्रवृत्ति का हिस्सा है जहां कंपनियां लागत दक्षता और स्केलेबिलिटी बढ़ाने के लिए AI मॉडल अपना रही हैं। हालांकि, बड़े पैमाने पर छंटनी सामाजिक और आर्थिक दृष्टि से गंभीर प्रभाव भी डाल सकती है।
संतुलित रणनीति और पारदर्शी संवाद ही ऐसे बदलावों को सफल बना सकते हैं।
निष्कर्ष
Livspace की 1,000 कर्मचारियों की छंटनी और सह-संस्थापक का इस्तीफा भारतीय स्टार्टअप जगत में एक बड़ा संकेत है कि AI अब केवल सहायक तकनीक नहीं, बल्कि मुख्य संचालन मॉडल बनता जा रहा है।
जहां एक ओर कंपनियां दक्षता और लाभप्रदता बढ़ाने की दिशा में कदम उठा रही हैं, वहीं कर्मचारियों के लिए यह समय कौशल उन्नयन और तकनीकी अनुकूलन का है। आने वाले महीनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि Livspace का AI-केंद्रित मॉडल कंपनी को स्थायी लाभप्रदता की ओर ले जाता है या नहीं।
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