राष्ट्रीय कवि काज़ी नज़्रुल इस्लाम की कब्र के पास अंतिम संस्कार, बांग्लादेश में बढ़ा सियासी तनाव
बांग्लादेश में राजनीतिक और सामाजिक माहौल उस समय और संवेदनशील हो गया, जब Anti-India कट्टरपंथी नेता शरीफ उस्मान हादी को ढाका विश्वविद्यालय परिसर में राष्ट्रीय कवि काज़ी नज़्रुल इस्लाम की कब्र के पास दफनाया गया। इस फैसले के बाद देश में विरोध, बहस और राजनीतिक बयानबाज़ी तेज हो गई है।
हादी की मौत पहले ही बांग्लादेश की राजनीति में उथल-पुथल मचा चुकी थी और अब उनके दफन स्थल को लेकर विवाद और गहराता दिख रहा है।
कौन थे शरीफ उस्मान हादी
शरीफ उस्मान हादी को बांग्लादेश में एक उग्र विचारधारा वाले छात्र और युवा नेता के रूप में जाना जाता था। वे सार्वजनिक मंचों पर भारत-विरोधी बयानबाज़ी और कट्टर राजनीतिक भाषणों के लिए चर्चा में रहते थे।
उनके समर्थक उन्हें एक आंदोलनकारी नेता मानते हैं, जबकि आलोचक उन्हें समाज में ध्रुवीकरण और अस्थिरता फैलाने वाला चेहरा बताते रहे हैं।
कैसे हुई हादी की मौत
रिपोर्ट्स के अनुसार, शरीफ उस्मान हादी हाल ही में ढाका में एक राजनीतिक कार्यक्रम के दौरान हमले में गंभीर रूप से घायल हो गए थे। इलाज के लिए उन्हें विदेश ले जाया गया, लेकिन इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई।
उनकी मौत की खबर सामने आते ही देश के कई हिस्सों में विरोध प्रदर्शन शुरू हो गए थे।
काज़ी नज़्रुल इस्लाम के पास दफनाने पर क्यों मचा विवाद
काज़ी नज़्रुल इस्लाम बांग्लादेश के राष्ट्रीय कवि हैं और उन्हें ‘विद्रोही कवि’ के रूप में सम्मान प्राप्त है। उनकी कब्र ढाका विश्वविद्यालय परिसर में स्थित है और यह स्थान राष्ट्रीय सम्मान और सांस्कृतिक विरासत का प्रतीक माना जाता है।
ऐसे में एक विवादास्पद और कट्टरपंथी नेता को उनके पास दफनाया जाना कई बुद्धिजीवियों, शिक्षाविदों और राजनीतिक विश्लेषकों को अस्वीकार्य लगा। आलोचकों का कहना है कि इससे नज़्रुल की विरासत को राजनीतिक रंग देने की कोशिश की गई है।
जनाजे में उमड़ी भारी भीड़, लगे नारे
हादी के अंतिम संस्कार में हजारों समर्थक शामिल हुए। जनाजे के दौरान ढाका के कई इलाकों में नारेबाज़ी हुई और सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई।
कुछ स्थानों पर स्थिति तनावपूर्ण हो गई, जिसके बाद प्रशासन को अतिरिक्त पुलिस और सुरक्षा बल तैनात करने पड़े।
बांग्लादेश की राजनीति पर पड़ सकता है गहरा असर
विशेषज्ञों का मानना है कि हादी की मौत और उनका दफन स्थल आने वाले समय में बांग्लादेश की छात्र राजनीति और कट्टर विचारधाराओं को और उभार सकता है।
भारत-बांग्लादेश संबंधों के संदर्भ में भी इस घटना को संवेदनशील माना जा रहा है, क्योंकि हादी की पहचान खुले तौर पर भारत-विरोधी बयानबाज़ी से जुड़ी रही है।
सरकार और प्रशासन की चुनौती
बांग्लादेश सरकार के सामने इस समय सबसे बड़ी चुनौती कानून-व्यवस्था बनाए रखना और हालात को राजनीतिक हिंसा में बदलने से रोकना है। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि किसी भी तरह की हिंसा या अराजकता को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
निष्कर्ष
शरीफ उस्मान हादी का दफन केवल एक अंतिम संस्कार नहीं, बल्कि बांग्लादेश के मौजूदा राजनीतिक और वैचारिक संघर्ष का प्रतीक बन गया है। राष्ट्रीय कवि काज़ी नज़्रुल इस्लाम के पास उनका दफन होना आने वाले दिनों में भी बहस और विवाद का विषय बना रह सकता है।
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