Chitaguppi Park का विकास कार्य कछुआ चाल से, आठ महीने बाद भी अधूरा पहला चरण

हुब्बल्ली (कर्नाटक):
शहर के सबसे पुराने और ऐतिहासिक सार्वजनिक स्थलों में शामिल Chitaguppi Park (लेडी साइकस गार्डन) के विकास कार्य की रफ्तार बेहद धीमी बनी हुई है। हुब्बल्ली-धारवाड़ नगर निगम (HDMC) द्वारा शुरू की गई इस परियोजना को लगभग आठ महीने बीत चुके हैं, लेकिन अब तक पहला चरण भी पूरी तरह समाप्त नहीं हो पाया है।

96 साल पुराना पार्क, लेकिन विकास की रफ्तार निराशाजनक

करीब 96 वर्ष पुराने Chitaguppi Park को आधुनिक सुविधाओं के साथ पुनर्विकसित करने की योजना के तहत नगर निगम ने इसका नवीनीकरण कार्य शुरू किया था। यह पार्क शहरवासियों के लिए हरियाली, सैर और सांस्कृतिक पहचान का अहम केंद्र माना जाता है।
हालांकि, लंबे समय से चल रहे काम के बावजूद ज़मीनी स्तर पर बदलाव सीमित ही दिखाई दे रहे हैं।

₹80 लाख की परियोजना, लेकिन पहला चरण ही अधूरा

नगर निगम द्वारा इस परियोजना के पहले चरण के लिए लगभग 80 लाख रुपये आवंटित किए गए हैं। इस चरण में पैदल मार्गों का सुधार, बैठने की व्यवस्था, बागवानी, जल आपूर्ति और बुनियादी सौंदर्यीकरण जैसे कार्य शामिल हैं।

हालात यह हैं कि—

  • पैदल रास्तों का काम आंशिक रूप से पूरा हुआ है
  • बेंच और बैठने की व्यवस्था अभी अधूरी है
  • बागवानी और जल प्रबंधन से जुड़े कई कार्य लंबित हैं

इस कारण पार्क का उपयोग करने वाले नागरिकों को अभी भी पूरी सुविधाएं नहीं मिल पा रही हैं।

सुस्त प्रगति पर HDMC सख्त, ठेकेदार को नोटिस जारी

Chitaguppi Park विकास कार्य में हो रही देरी को लेकर HDMC अधिकारियों ने ठेकेदार को नोटिस जारी किया है। अधिकारियों का कहना है कि पहले चरण के शेष कार्य 20 दिनों के भीतर पूरे करने के निर्देश दिए गए हैं।

नगर निगम के अनुसार, पहले चरण का काम पूरा होने के बाद ही दूसरे चरण की योजना, डिज़ाइन और बजट पर निर्णय लिया जाएगा।

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नागरिकों की चिंता: हरित क्षेत्र की अनदेखी न हो

स्थानीय नागरिकों और पर्यावरण प्रेमियों का कहना है कि Chitaguppi Park केवल एक मनोरंजन स्थल नहीं, बल्कि शहर का महत्वपूर्ण हरित फेफड़ा है। उनका मानना है कि विकास कार्य में देरी से न केवल सुविधाएं प्रभावित हो रही हैं, बल्कि पार्क की समग्र स्थिति भी बिगड़ रही है।

लोगों की मांग है कि—

  • कार्य की नियमित निगरानी की जाए
  • स्पष्ट समयसीमा सार्वजनिक की जाए
  • ऐतिहासिक स्वरूप से समझौता किए बिना विकास किया जाए

विकास बनाम संरक्षण: संतुलन की जरूरत

विशेषज्ञों का मानना है कि Chitaguppi Park जैसे विरासत स्थलों के विकास में केवल सौंदर्यीकरण नहीं, बल्कि संरक्षण और उपयोगिता का संतुलन भी जरूरी है। प्रकाश व्यवस्था, साफ रास्ते, बैठने की सुविधा और हरियाली का संरक्षण—ये सभी पहलू योजना का हिस्सा होने चाहिए।

निष्कर्ष: देरी से बढ़ी नाराजगी, जवाबदेही की मांग तेज

Chitaguppi Park का धीमी गति से चल रहा विकास कार्य नगर प्रशासन के लिए एक चेतावनी है। यदि तय समय में परियोजना पूरी नहीं हुई, तो जनता का भरोसा और अधिक कमजोर हो सकता है। अब शहरवासियों की निगाहें इस पर टिकी हैं कि नगर निगम अपने दावों को कब ज़मीनी हकीकत में बदलता है।

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