हुब्बल्ली (कर्नाटक):
शहर का प्रमुख परिवहन केंद्र NWKRTC Hosur क्षेत्रीय बस टर्मिनल गंभीर लापरवाही और वर्षों से चली आ रही उपेक्षा का उदाहरण बनता जा रहा है। रोज़ाना हजारों यात्रियों की आवाजाही वाले इस टर्मिनल में गंदगी, दुर्गंध और अव्यवस्थित रखरखाव ने यात्रियों की परेशानी बढ़ा दी है।
पांच साल में बदली तस्वीर, सुविधाओं के दावे खोखले
साल 2020 में लंबी दूरी की बस सेवाओं के लिए शुरू किया गया Hosur बस टर्मिनल आज जर्जर हालात में पहुंच चुका है। यात्रियों का कहना है कि टर्मिनल की दीवारों, फर्श और प्रतीक्षालयों में हर तरफ गंदगी फैली रहती है। पान-गुटखा के दाग, प्लास्टिक कचरा और सिगरेट के पैकेट आम नज़ारा बन चुके हैं।
यात्रियों का अनुभव: “यह बस स्टैंड नहीं, उपेक्षा का नमूना है”
बस से यात्रा करने वाले शिवराज चिकोडी ने बताया कि लाखों रुपये खर्च होने के बावजूद पिछले कई वर्षों से टर्मिनल की नियमित सफाई नहीं हो रही है। उनका कहना है कि किसी भी शहर का बस टर्मिनल उसकी पहली पहचान होता है, लेकिन हॉसुर टर्मिनल की हालत बेहद निराशाजनक है।
वहीं बागलकोट से आए यात्री प्रशांत कोटी ने कहा कि टर्मिनल में पर्याप्त डस्टबिन तक उपलब्ध नहीं हैं, जिसके कारण यात्री मजबूरी में इधर-उधर कचरा फेंक देते हैं।
जिम्मेदार कौन? सफाई अनुबंध के बावजूद हालात जस के तस
NWKRTC Hosur डिवीजन के अधिकारियों के अनुसार, टर्मिनल की सफाई के लिए एक निजी एजेंसी से हर महीने लगभग एक लाख रुपये का अनुबंध किया गया है। दावा किया गया है कि रोज़ाना दो बार सफाई कराई जाती है।
हालांकि ज़मीनी हकीकत इन दावों से मेल नहीं खाती। यात्रियों का कहना है कि न तो सफाई दिखाई देती है और न ही किसी प्रकार की नियमित निगरानी।
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नियम तो हैं, पालन नदारद
अधिकारियों ने यह भी बताया कि टर्मिनल परिसर में गंदगी फैलाने और सार्वजनिक स्थानों पर थूकने वालों पर जुर्माना लगाया जा रहा है। बावजूद इसके, यात्रियों का मानना है कि कार्रवाई बहुत सीमित है और उसका असर दिखाई नहीं देता।
महत्वपूर्ण रूट, लेकिन बुनियादी सुविधाओं का अभाव
Hosur बस टर्मिनल से विजयपुरा, बागलकोट, कोप्पल, सावदत्ती और रनबेन्नूर जैसे महत्वपूर्ण मार्गों के लिए बसें संचालित होती हैं। इतनी बड़ी संख्या में यात्रियों की आवाजाही के बावजूद साफ-सफाई, बैठने की उचित व्यवस्था और स्वच्छ शौचालय जैसी बुनियादी सुविधाएं संतोषजनक नहीं हैं।
यात्रियों की प्रमुख मांगें
यात्रियों और स्थानीय नागरिकों ने प्रशासन से मांग की है कि—
- टर्मिनल में नियमित और प्रभावी सफाई व्यवस्था सुनिश्चित की जाए
- डस्टबिन की संख्या बढ़ाई जाए
- सफाई एजेंसी के काम की सख्त निगरानी हो
- लापरवाही पाए जाने पर जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई की जाए
निष्कर्ष: कागज़ी योजनाओं से नहीं बदलेगी ज़मीनी सच्चाई
Hosur बस टर्मिनल की स्थिति यह दर्शाती है कि केवल बजट आवंटन और अनुबंध करने से समस्या का समाधान नहीं होता। जब तक निरंतर निगरानी, जवाबदेही और यात्रियों की सुविधा को प्राथमिकता नहीं दी जाएगी, तब तक यह टर्मिनल यूं ही बदहाली का शिकार बना रहेगा।
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