हब्बल्ली, कर्नाटक | अपडेट: 17 दिसंबर 2025
हब्बल्ली स्थित कर्नाटक खादी ग्रामोद्योग संयुक्त संघ (KKGSS), जो देश का एकमात्र बीआईएस मान्यता प्राप्त National flag manufacturing centre है, 77वें गणतंत्र दिवस (26 जनवरी 2026) के लिए अब तक किसी भी बड़े आदेश का इंतज़ार कर रहा है।
उत्पादन केंद्र को पड़े भारी प्रभाव
KKGSS द्वारा कई प्रकार के खादी के राष्ट्रीय ध्वज तैयार कर ₹2 करोड़ से अधिक का स्टॉक पहले ही बना लिया गया है, लेकिन बड़ी सरकारी और संस्थागत खरीदारी के आदेश अभी तक नहीं आए हैं।
इसके परिणामस्वरूप:
- स्वतंत्रता दिवस के दौरान इस केंद्र की बिक्री केवल ₹54 लाख रही, जबकि पहले वर्षों में यह लगभग ₹2.5 करोड़ तक थी।
- ध्वज बनाने वाले कारीगरों को अब बैग और अन्य वस्तुएँ सीवन जैसे अन्य कामों में लगाया जा रहा है, ताकि उनका रोजगार जारी रहे।
नीति में बदलाव का असर
2022 में ‘हर घर तिरंगा’ (Har Ghar Tiranga) अभियान के तहत राष्ट्रीय ध्वज को लेकर ध्वज कोड में संशोधन किया गया था, जिससे पॉलिएस्टर ध्वज को भी मान्यता दी गई।
विश्लेषकों के अनुसार, इस बदलाव से:
- परंपरागत खादी के राष्ट्रीय ध्वज की मांग गिर गई है।
- मशीन द्वारा निर्मित पॉलिएस्टर झंडों ने बाजार में स्थान बना लिया है।
- ऐसे में बीआईएस-प्रमाणित खादी ध्वज का आदेश कम आ रहा है, जिससे स्थानीय उद्योग प्रभावित हुआ है।
KKGSS के अधिकारियों ने बताया कि उन्होंने केंद्र सरकार से ध्वज कोड वापस संशोधित करने का अनुरोध किया है, लेकिन अभी तक कोई ठोस प्रतिक्रिया नहीं मिली है।
कर्मचारियों की आशंका और चुनौती
केंद्रीय केन्द्र की मैनेजर अन्नपूर्णा डोड्डामणि का कहना है कि हर वर्ष 25–30 कर्मचारियों का ध्वज उत्पादन में काम होता था, लेकिन अब आदेश न मिलने से स्थिति गंभीर हो गई है।
सेक्रेटरी शिवानंद माथापति के अनुसार, ध्वज कोड संशोधन के कारण खादी ध्वज की मांग कमजोर हुई है, और इसका असर छोटे और पारंपरिक कारीगरों तक पहुंचा है।
टिप्पणी
यह मामला इस ओर संकेत करता है कि देशभक्ति के प्रतीक राष्ट्रीय ध्वज जैसे उत्पादों पर नीति में बदलाव का व्यापक प्रभाव पारंपरिक कारीगरों और छोटे उद्योगों पर भी पड़ सकता है। ऐसे समय में इन उद्योगों के लिए सरकारी योजना एवं समर्थन विशेष रूप से महत्वपूर्ण हो गया है।
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