हुबली (कर्नाटक):
नॉर्थ वेस्टर्न कर्नाटक रोड ट्रांसपोर्ट कॉर्पोरेशन (NWKRTC) एक बार फिर विवादों में घिर गया है। इस बार मामला निगम की बसों पर लगाए गए तंबाकू से जुड़े उत्पादों के विज्ञापनों का है, जिसे लेकर आम जनता, सामाजिक कार्यकर्ताओं और अभिभावकों में भारी नाराज़गी देखने को मिल रही है।
बसों पर दिखे विवादित विज्ञापन, जनता का गुस्सा फूटा
NWKRTC की कुछ सिटी बसों पर पान मसाला जैसे उत्पादों के बड़े-बड़े विज्ञापन लगाए गए हैं। विरोध करने वालों का कहना है कि ये विज्ञापन सीधे तौर पर भले तंबाकू का नाम न लें, लेकिन अप्रत्यक्ष रूप से तंबाकू उत्पादों को बढ़ावा देते हैं।
इसी कारण लोग इसे सार्वजनिक स्वास्थ्य के लिए खतरा मान रहे हैं।
वायरल वीडियो ने बढ़ाया विवाद
इस पूरे मामले को तब और हवा मिली जब एक नागरिक का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया।
वीडियो में व्यक्ति बस पर लगे विज्ञापन को हटाते हुए दिखाई देता है और यह सवाल उठाता है कि —
“एक तरफ सरकार तंबाकू के खिलाफ जागरूकता फैलाती है, दूसरी तरफ सरकारी बसों पर उसका प्रचार क्यों?”
बच्चों और युवाओं पर गलत प्रभाव का आरोप
अभिभावकों और शिक्षाविदों का कहना है कि सरकारी बसें रोज़ाना हजारों छात्रों और युवाओं की आवाजाही का माध्यम हैं।
ऐसे में तंबाकू या उससे जुड़े उत्पादों का प्रचार —
- बच्चों को गलत संदेश देता है
- नशे के प्रति सामान्यीकरण करता है
- सरकारी नीतियों के विपरीत जाता है
सामाजिक कार्यकर्ताओं ने NWKRTC की मंशा पर उठाए सवाल
स्थानीय सामाजिक कार्यकर्ताओं का आरोप है कि निगम ने राजस्व के लालच में सामाजिक जिम्मेदारी को नजरअंदाज किया है।
उनका कहना है कि कई बसों पर विज्ञापन इतने बड़े हैं कि NWKRTC का आधिकारिक लोगो और पहचान तक ढक जाती है, जो नियमों का उल्लंघन है।
कानून क्या कहता है? विशेषज्ञों की राय
कानूनी विशेषज्ञों के अनुसार, COTPA अधिनियम 2003 के तहत —
- तंबाकू उत्पादों के प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष विज्ञापन पर रोक है
- सुरोगेट विज्ञापन (पान मसाला के नाम पर गुटखा/तंबाकू का प्रचार) भी कानून के दायरे में आता है
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि जांच हुई, तो यह मामला कानूनी कार्रवाई तक जा सकता है।
NWKRTC का पक्ष: “यह तंबाकू विज्ञापन नहीं”
विवाद बढ़ने पर NWKRTC प्रबंधन की ओर से सफाई दी गई।
निगम अधिकारियों का कहना है कि —
- बसों पर लगाए गए विज्ञापन पान मसाला के हैं, न कि सीधे तंबाकू उत्पादों के
- विज्ञापन नीति के तहत इन्हें अनुमति दी गई है
हालांकि, जनता इस तर्क से संतुष्ट नहीं दिख रही।
सार्वजनिक स्वास्थ्य बनाम राजस्व: बड़ा सवाल
यह विवाद एक बड़े मुद्दे की ओर इशारा करता है —
क्या सरकारी संस्थानों को कमाई के लिए ऐसे उत्पादों का प्रचार करना चाहिए, जो स्वास्थ्य के लिए हानिकारक माने जाते हैं?
विशेषज्ञों का कहना है कि सरकारी परिवहन सेवाओं को आदर्श स्थापित करना चाहिए, न कि समाज के लिए गलत उदाहरण।
निष्कर्ष
NWKRTC का यह मामला सिर्फ विज्ञापन तक सीमित नहीं है, बल्कि यह —
- सरकारी नैतिकता
- सार्वजनिक स्वास्थ्य
- और युवाओं के भविष्य
से जुड़ा हुआ सवाल बन चुका है।
अब देखना होगा कि जनता के दबाव और बढ़ते विरोध के बीच निगम इस फैसले पर पुनर्विचार करता है या नहीं।