मध्य पूर्व शांति पहल में भारत को अहम साझेदार बनाने की अमेरिकी कोशिश
अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति और रिपब्लिकन नेता डोनाल्ड ट्रंप ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को गाजा के भविष्य से जुड़ी एक अंतरराष्ट्रीय पहल ‘Board of Peace’ का हिस्सा बनने का आमंत्रण दिया है। यह जानकारी अंतरराष्ट्रीय समाचार चैनल WION की रिपोर्ट में सामने आई है। इस पहल का उद्देश्य गाजा में संघर्ष के बाद शांति, स्थिरता और प्रशासनिक पुनर्गठन को लेकर वैश्विक स्तर पर सहयोग बढ़ाना बताया जा रहा है।
क्या है ‘Board of Peace’? गाजा के भविष्य की रूपरेखा
रिपोर्ट के अनुसार, ‘Board of Peace’ एक प्रस्तावित अंतरराष्ट्रीय मंच है, जिसे गाजा में लंबे समय से जारी हिंसा के बाद स्थायी समाधान और शांति प्रक्रिया के लिए गठित करने का विचार सामने आया है।
इस बोर्ड में शामिल देशों से अपेक्षा की जाएगी कि वे—
- गाजा में शांति स्थापना की रणनीति पर सुझाव दें
- पुनर्निर्माण और मानवीय सहायता पर सहयोग करें
- भविष्य के प्रशासनिक ढांचे को लेकर अंतरराष्ट्रीय सहमति बनाने में भूमिका निभाएं
ट्रंप का संदेश: भारत की वैश्विक छवि पर भरोसा
WION की रिपोर्ट के मुताबिक, ट्रंप की ओर से यह आमंत्रण ऐसे समय पर आया है जब भारत को एक जिम्मेदार वैश्विक शक्ति के रूप में देखा जा रहा है।
प्रधानमंत्री मोदी को आमंत्रित करना इस बात का संकेत माना जा रहा है कि अमेरिका भारत को—
- वैश्विक शांति प्रयासों में प्रभावशाली भूमिका निभाने वाला देश
- संतुलित और व्यावहारिक कूटनीति अपनाने वाला नेतृत्व
- संघर्ष क्षेत्रों में विश्वसनीय भागीदार
के रूप में देखता है।
किन देशों को मिल सकता है न्योता?
सूत्रों के अनुसार, इस प्रस्तावित बोर्ड में केवल भारत ही नहीं, बल्कि मध्य पूर्व, यूरोप और एशिया के कई देशों को शामिल करने पर विचार किया जा रहा है। इसका उद्देश्य गाजा मुद्दे को केवल क्षेत्रीय नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय सहयोग के जरिए हल करना है।
भारत की भूमिका क्यों मानी जा रही है अहम?
भारत की विदेश नीति लंबे समय से—
- शांति और संवाद पर जोर
- मानवीय सहायता में सक्रिय भागीदारी
- इज़राइल और फिलिस्तीन, दोनों के साथ संतुलित संबंध
पर आधारित रही है।
इसी कारण विशेषज्ञ मानते हैं कि यदि भारत इस तरह के किसी मंच से जुड़ता है, तो वह विश्वसनीय मध्यस्थ की भूमिका निभा सकता है।
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राजनीतिक और कूटनीतिक मायने
विश्लेषकों के अनुसार, यह आमंत्रण सिर्फ एक औपचारिक प्रस्ताव नहीं है, बल्कि इसके कई कूटनीतिक संकेत हैं—
- भारत-अमेरिका संबंधों की गहराई
- वैश्विक मुद्दों पर भारत की बढ़ती स्वीकार्यता
- मध्य पूर्व नीति में नए संतुलन की तलाश
हालांकि, यह भी स्पष्ट किया जा रहा है कि अभी यह एक प्रस्तावित पहल है और इस पर अंतिम निर्णय संबंधित देशों की सहमति के बाद ही लिया जाएगा।
आधिकारिक प्रतिक्रिया का इंतजार
फिलहाल, भारत सरकार की ओर से इस आमंत्रण पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। कूटनीतिक हलकों में इसे लेकर चर्चा जारी है कि भारत इस प्रस्ताव को किस रूप में देखता है और क्या वह ऐसे किसी मंच में औपचारिक भूमिका निभाने के लिए आगे बढ़ेगा।
निष्कर्ष
डोनाल्ड ट्रंप द्वारा प्रधानमंत्री मोदी को गाजा के लिए प्रस्तावित ‘Board of Peace’ में आमंत्रित किया जाना, भारत की वैश्विक कूटनीतिक हैसियत को दर्शाने वाला कदम माना जा रहा है। यदि यह पहल आगे बढ़ती है, तो आने वाले समय में भारत की भूमिका न केवल एशिया बल्कि मध्य पूर्व की शांति प्रक्रिया में भी निर्णायक हो सकती है।
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